सीहोर का ऐतिहासिक सवेरा, पहली बार किसी आम आदमी को मिली पुलिस सलामी, अमर हो गए देहदानी मनोहर महेश्वरी

सीहोर। जिले के इतिहास में रविवार का दिन एक ऐसी मिसाल बन गया, जिसने ‘अमरता’ की परिभाषा बदल दी। अब तक हमने केवल शहीदों, बड़े राजनेताओं को ही पुलिस की सलामी (गार्ड ऑफ ऑनर) लेते देखा था, लेकिन रविवार को जिला अस्पताल परिसर में नजारा बिल्कुल अलग था। यहां गल्ला मंडी के एक साधारण निवासी मनोहर महेश्वरी को पुलिस और होमगार्ड के जवानों ने शस्त्र झुकाकर सलामी दी। यह सम्मान उन्हें उनकी असाधारण सोच और मानवता के प्रति उनके सबसे बड़े दान (देहदान) के लिए दिया गया।
बता दें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जुलाई 2025 में एक ऐतिहासिक फैसला लिया था कि समाज के असली नायकों (देहदानियों) को राजकीय सम्मान दिया जाएगा। जिले में मनोहर महेश्वरी पहले ऐसे व्यक्ति बने, जिन्हें सरकार के इस नए नियम के तहत यह गौरव प्राप्त हुआ। जब सुबह 11.30 बजे पुलिस के जवानों ने बिगुल बजाकर उन्हें सलामी दी तो वहां मौजूद हर नागरिक की आंखें नम थीं, लेकिन सीना गर्व से चौड़ा था।
11 साल पहले लिया था संकल्प
इंद्रा कॉलोनी निवासी उनके बेटे महेंद्र महेश्वरी ने बताया कि उनके पिता ने वर्ष 2014 में ही देहदान का संकल्प ले लिया था। 2020 में उन्होंने विधिवत फॉर्म भरा। रविवार तडक़े 3.18 बजे जब उन्होंने अंतिम सांस ली तो परिजनों ने शोक मनाने के बजाय उनकी अंतिम इच्छा को पूरा करने का बीड़ा उठाया। परिवार ने तय किया कि वे पिता को अग्नि के हवाले नहीं करेंगे, बल्कि उनकी देह को विद्या दान (मेडिकल रिसर्च) के लिए सौंपेंगे।
गुरू बन भावी डॉक्टरों को सिखाएंगे पाठ
सिविल सर्जन डॉ. उमेश श्रीवास्तव के अनुसार बताया कि सम्मानजनक सलामी के बाद मनोहर जी की पार्थिव देह को भोपाल के हमीदिया अस्पताल (गांधी मेडिकल कॉलेज) रवाना कर दिया गया है। वे अब एक अदृश्य गुरु की तरह मेडिकल छात्रों के काम आएंगे, जो उनकी देह पर रिसर्च कर भविष्य में लोगों की जान बचाना सीखेंगे।
क्यों खास है यह राजकीय सम्मान
गार्ड ऑफ ऑनर: विदाई के समय पुलिस द्वारा सलामी दी जाएगी, ताकि समाज में संदेश जाए कि यह कार्य महान है।
राष्ट्रीय पर्वों पर मान: अब मनोहर महेश्वरी जैसे दानवीरों के परिवारों को हर साल 26 जनवरी और 15 अगस्त पर जिला स्तरीय समारोहों में वीआईपी गेस्ट के रूप में बुलाकर सम्मानित किया जाएगा।

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