
बेंगलूरु। कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में युवती की दर्ज रिपोर्ट पर युवक के खिलापफ लगाए गए बलात्कार के आरोपों को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि युवती और युवक एक नहीं, दो नहीं, तीन नहीं बल्कि छह साल तक सहमति से साथ रहे। अब दूरी कम होने पर इसे बलात्कार की परिभाषा में नहीं लाया जा सकता। युवती ने बेंगलूरु के युवक के खिलाफ शादी का वादा कर शारीरिक शोषण करने और बाद में मुकर जाने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया था। युवती और युवक सोशल मीडिया के जरिए एक दूसरे संपर्क में आए थे।
और क्या कहा कोर्ट ने
हाईकोर्ट के न्यायाधीश एम नागा प्रसन्ना ने कहा कि 2013 में मुलाकात के बाद पहले दिन से लेकर 27 दिसंबर 2019 तक दोनों ने सहमति से संबंध बनाए। इसके बाद 2021 में युवक के खिलाफ इंदिरानगर थाने और महिला थाने में बलात्कार का केस दर्ज कराया जाता है। यह कानून के गलत उपयोग का स्प्ष्ट उदाहरण है। न्यायाधीश ने कहा कि इस मामले को आगे भी कार्रवाई में जारी रखा गया तो यह सुप्रीम कोर्ट के इसी तरह के दिए गए फैसले का उल्लंघन होगा।
युवती ने लगाए थे ये आरोप
अपनी शिकायत में युवती ने बताया था कि वह 2013 में सोशल मीडिया के जरिए युवक के संपर्क में आई थी। उनकी पहचान बढी और वह पास में रह रहे युवक के घर जाने लगी। युवक बहुत अच्छा शेफ है और खाना बहुत स्वादिष्ट बनाता है। धीरे धीरे उनके बीच संबंध बने और युवक ने युवती से शादी का वादा किया। बाद में वह शादी से मुकर गया था।