
सीहोर। पुलिस मुख्यालय के निर्देशों का पालन करते हुए जिला पुलिस ने वर्ष 2025 में मानवता की एक बड़ी मिसाल पेश की है। पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार शुक्ला के कुशल निर्देशन में चलाए गए ‘मुस्कान अभियान’ के तहत जिले की पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए कुल 292 गुमशुदा बालक-बालिकाओं को सुरक्षित खोजकर उनके परिजनों के सुपुर्द किया। पुलिस की इस प्रभावी कार्यवाही ने न केवल बच्चों को उनके माता-पिता से मिलाया, बल्कि कानून व्यवस्था के प्रति जनता का भरोसा भी मजबूत किया है।
वर्ष 2025 के आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले में कुल 338 बच्चों की गुमशुदगी के मामले पुलिस के सामने थे, जिनमें से 270 मामले इसी वर्ष के थे और 68 मामले पिछले वर्षों के लंबित थे। पुलिस ने कड़ी मेहनत करते हुए इनमें से 292 बच्चों को बरामद करने में सफलता हासिल की। खोजे गए बच्चों में 37 बालक और 255 बालिकाएं शामिल हैं। सीहोर पुलिस की टीमें बच्चों की तलाश में केवल जिले तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने प्रदेश और देश की सीमाओं से बाहर जाकर भी अभियान चलाया।
बाहरी राज्यों से भी नाबालिग बरामद
पुलिस ने मध्यप्रदेश के बाहर अन्य राज्यों जैसे गुजरात से 10, राजस्थान से 5, महाराष्ट्र से 4, उत्तर प्रदेश से 3 और पंजाब से 1 बच्चे को सुरक्षित खोजा। इसी तरह प्रदेश के अन्य जिलों जैसे इंदौर, भोपाल, उज्जैन, देवास, सागर और नर्मदापुरम सहित कई अन्य शहरों से भी 44 बच्चों को बरामद किया गया. जिले के भीतर से भी 225 बच्चों को खोजकर उनके घर पहुंचाया गया।
पुराने मामले भी सुलझाए
इस अभियान की सबसे बड़ी कामयाबी उन पुराने मामलों को सुलझाना रही जो बरसों से लंबित थे। पुलिस ने साल 2019 से लेकर 2024 तक के 34 लंबित मामलों में बच्चों को खोजा है। एसपी दीपक कुमार शुक्ला ने बताया कि यह सफलता शीघ्र एफआईआर दर्ज करने, तकनीकी संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और दूसरे राज्यों की पुलिस से बेहतर तालमेल बिठाने के कारण मिली है। जिला पुलिस हर बच्चा सुरक्षित, हर परिवार आश्वस्त के संकल्प के साथ आगे भी इसी संवेदनशीलता से कार्य करती रहेगी।
