
सोमवार को नाग पंचमी मनाई जा रही है। इस वर्ष नाग पंचमी इसलिए विशेष है, क्योंकि यह श्रावण मास के तीसरे सोमवार के साथ पड़ रही है। पंचमी तिथि सोमवार शाम लगभग 5 बजे तक है। साथ ही पंचांग में रवि योग और शुभ योग का उल्लेख मिलता है।
नाग पंचमी का विशेष धार्मिक महत्व –
नाग पंचमी सनातन परंपरा में केवल नाग देवता की पूजा का पर्व नहीं है, बल्कि यह भगवान शिव, प्रकृति, जल, धरती और समस्त जीव-जगत के प्रति सम्मान का संदेश देने वाला पर्व भी है। मान्यता है कि नाग भगवान शिव के परम भक्त और उनके आभूषण स्वरूप हैं। भगवान शिव के गले में विराजमान नाग भय पर नियंत्रण, शक्ति, संरक्षण और आध्यात्मिक ऊर्जा के प्रतीक माने जाते हैं, इसलिए नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा के साथ भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है।
इस बार है खास संयोग –
आज नाग पंचमी और सावन का तीसरा सोमवार एक ही दिन है। सावन सोमवार भगवान शिव को समर्पित होता है और नाग भगवान शिव से सीधे जुड़े हैं। इसलिए शिव पूजा और नाग पूजा का यह संयोग धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। आज पंचांग में रवि योग का उल्लेख है। ज्योतिषीय परंपरा में रवि योग को शुभ कार्यों और सकारात्मक आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए अनुकूल माना जाता है। आज चित्रा नक्षत्र और शुभ योग का भी संयोग बताया गया है। पंचांग के अनुसार चंद्रमा तुला राशि में रहेगा। आज सूर्य के सिंह राशि में प्रवेश का भी उल्लेख है। ज्योतिषीय मान्यता में सूर्य का अपनी राशि सिंह में प्रवेश आत्मविश्वास, नेतृत्व और तेज से जोड़ा जाता है।
नाग पंचमी पर क्या करें –
– प्रातः स्नान करके भगवान शिव और नाग देवता का स्मरण करें
– शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करें।
– नाग देवता की प्रतिमा या चित्र का विधिपूर्वक पूजन करें।
– ॐ नमः शिवाय का जाप करें।
– नाग देवता के लिए श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करें।
– जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, वस्त्र या अपनी क्षमता के अनुसार दान करें।
– घर में सुख-शांति और परिवार की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करें।
– प्रकृति और जीव-जंतुओं की रक्षा का संकल्प लें।
– ध्यान रखें कि जीवित सांप को दूध पिलाना उचित नहीं है। नाग पूजा प्रतीकात्मक रूप से प्रतिमा/चित्र के माध्यम से करना बेहतर है।
नाग पंचमी पर विशेष मंत्र –
ॐ नमः शिवाय का 108 बार जाप किया जा सकता है। नाग देवता के लिए प्रचलित मंत्र: ॐ नागदेवताभ्यो नमः। श्रद्धा के साथ भगवान शिव का पंचाक्षरी मंत्र जाप करना इस दिन विशेष रूप से उपयुक्त माना जाता है।
नाग पंचमी का पर्यावरणीय संदेश –
नाग पंचमी का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पक्ष प्रकृति संरक्षण भी है। सांप खेतों में चूहों और अन्य कीटों की संख्या नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारतीय परंपरा ने नाग पूजा के माध्यम से मनुष्य और प्रकृति के बीच संतुलन का संदेश दिया है। इसी कारण कई परंपराओं में नाग पंचमी के दिन भूमि खोदने या अनावश्यक रूप से मिट्टी हटाने से बचने की बात कही जाती है। नाग पंचमी हमें सिखाती है कि शक्ति का अर्थ केवल विजय प्राप्त करना नहीं, बल्कि प्रकृति और प्रत्येक जीव के प्रति सम्मान रखना भी है। आज अगर शिव मंदिर जाएं तो नाग देवता को भगवान शिव से अलग न मानकर शिव-शक्ति और प्रकृति के संतुलन के प्रतीक के रूप में स्मरण करना विशेष भावपूर्ण साधना हो सकती है।