
सुमित शर्मा, सीहोर।
विधानसभा चुनाव को लेकर चल रहे प्रचार-प्रसार का शोर थमनेे के बाद अब प्रत्याशियों को चुनने का समय आ गया है। सीहोर जिले की चारों विधानसभा सीटोें पर इस बार भाजपा, कांग्रेस में कड़ा मुकाबला है तो वहीं बसपा, सपा सहित निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी मैदान संभाल रखा है। विधानसभा चुनाव में सीहोर विधानसभा में इस बार धनबल-बाहुबल के बीच में कड़ा चुनावी मुकाबला है। दरअसल सीहोर से भाजपा प्रत्याशी सुदेश राय बड़े शराब कारोबारी हैं तो वहीं उनके अन्य काम धंधेे भी फैले हुए हैैं। चुनाव में भी उन्होंने पानी की तरह पैसा बहाया। भले ही उन्होंने चुनावी खर्च सीमा 40 लाख से कम खर्च करना दर्शाया है, लेकिन चुनाव में करोड़ों रूपए पानी की तरफ फूकें गए हैं। सीहोर में कांग्रेस प्रत्याशी शशांक सक्सेना एवं उनकेे पिताजी कद्दावर नेता रमेेश सक्सेना को यहां पर बाहुबल के तौर पर जाना जाता है। रमेश सक्सेना सीहोर विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक रहे हैैं तो वहीं उनके बेटे एवं कांग्रेस प्रत्याशी शशांक सक्सेना भी जिला पंचायत सदस्य हैं। मुख्य मुकाबला भाजपा-कांग्रेस के बीच में ही है, लेकिन यहां पर बसपा प्रत्याशी कमलेश दोहरे ने भी ताल ठोकी हुई है, इसलिए मुकाबला त्रिकोणीय माना जा रहा है।
इछावर में कांग्रेस प्रत्याशी भारी-
आष्टा में आयातित प्रत्याशियों के भरोसे भाजपा-कांग्रेस-
सीहोर जिले की आष्टा विधानसभा सीट पर इस बार भाजपा-कांग्रेस आयातित प्रत्याशियों के भरोसे चुनावी मैदान में है। भाजपा ने कांग्रेस से आयातित इंजीनियर गोपाल सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया है तो वहीं
17 नवंबर एवं 3 दिसंबर दिवस शुष्क दिवस घोषित, उससे पहले ही गांव-गांव में पहुंची शराब की खेप
भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार विधानसभा निर्वाचन-2023 को दृष्टिगत रखते हुए कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी प्रवीण सिंह द्वारा 15 नवम्बर 2023 की सांय 5 बजे से 17 नवंबर को मतदान समाप्ति तक तथा 3 दिसम्बर 2023 को शुष्क दिवस घोषित करते हुए मदिरा की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री सिंह द्वारा जारी आदेश अनुसार शुष्क दिवसों में संपूर्ण जिले की परिसीमा में स्थित एवं संचालित समस्त कम्पोजिट मदिरा दुकानों, एफएल-3 होटल, बार एवं जिले में स्थित देशी मद्यभंडागार सीहोर, आष्टा, भैरूंदा से मदिरा का आयात, निर्यात, परिवहन, क्रय, विक्रय एवं प्रदाय पर पूर्णतः प्रतिबंध रहेगा। हालांकि इससे पहले ही गांव-गांव में शराब की खेप भेजी जा चुकी है, ताकि चुनाव में शराब बांटकर माहौल बनाया जा सके।