अमानक बीज बेचने वाले जैन कृषि सेवा केंद्र में फिर गड़बड़ियां, अब किसान से मांगें खाद के अतिरिक्त पैसे

- जैन कृषि सेवा केंद्र लाड़कुई पर 100 रूपए प्रति बोरी अतिरिक्त राशि मांगने का आरोप, 3 घंटे इंतजार के बाद खाली हाथ लौटा किसान

भैरुंदा। अमानक बीज बेचने वाले लाड़कुई स्थित जैन कृषि सेवा केंद्र में फिर से गड़बड़ी का मामला सामने आया है। इस बार जैन कृषि सेवा केंद्र में किसान से खाद के टोकन के बाद भी अतिरिक्त राशि की मांग की गई है। किसान का आरोप है कि उससे प्रति बोरी 100 रूपए अतिरिक्त मांगे गए, लेकिन उन्होंने देने से मना कर दिया तो उन्हें खाद भी नहीं दिया गया। मामला सामने आने के बाद एसडीएम भैरूंदा सुधीर कुशवाह ने जांच के निर्देश दिए हैं एवं अधिकारियों की निगरानी में खाद वितरण कराने की बात कही है। यहां बता दें कि जैन कृषि सेवा केंद्र लाड़कुई पर अमानक बीज बेचने के आरोप भी लगे थे। जांच में यह आरोप सही पाए जाने पर लाइसेंस भी निलंबित किया गया था। हालांकि बाद में सांठ-गांठ करके लाइसेंस वापस ले लिया गया। अब किसान से खाद के अतिरिक्त पैसे मांगने के आरोप भी लगे हैं।
खाद के लिए किसान हो रहे परेशान-
खाद के लिए ई-टोकन व्यवस्था शुरू की गई है। ई-टोकन के बाद ही किसानों को खाद मिलता है, लेकिन इससे कई किसान परेशान भी हैं। ई-टोकन लेने के बाद भी किसानों को खाद नहीं उपलब्ध हो पा रहा है। खाद की किल्लत के बीच किसानों को कई बार एमपी ऑनलाइन पर जाकर ई टोकन लेना पड़ रहा है, लेकिन उसके बाद भी खाद नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में किसानों में जमकर नाराजगी भी है। खाद की किल्लत और वितरण व्यवस्था के बीच लाड़कुई स्थित जैन कृषि सेवा केंद्र को लेकर किसान बिहारीलाल सैनी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। किसान का कहना है कि उसने शासन के ई-टोकन सिस्टम के माध्यम से जैन कृषि सेवा केंद्र के नाम से खाद बुक कराई थी, जिसकी अंतिम तिथि 28 सितंबर 2026 थी। किसान के मुताबिक, जब वह निर्धारित समय पर खाद लेने जैन कृषि सेवा केंद्र पहुंचा तो उससे प्रति बोरी 100 अतिरिक्त राशि मांगी गई। जब किसान ने अतिरिक्त राशि देने से मना किया तो मोबाइल नहीं चलने का बहाना बनाकर खाद नहीं दिया गया। किसान का दावा है कि इस पूरी बातचीत का उसने वीडियो भी बनाया है, जिसमें कथित तौर पर अतिरिक्त राशि की मांग किए जाने की बात दिखाई देती है।
तीन घंटे तक भटकता रहा किसान-
किसान का आरोप है कि खाद लेने के लिए उसे करीब तीन घंटे तक इधर-उधर घुमाया गया, लेकिन अंत में उसे खाद नहीं दी गई और वह खाली हाथ घर लौटने को मजबूर हुआ। किसान का यह भी दावा है कि उसी दौरान कुछ अन्य लोगों को पैसे लेकर खाद दिया गया है। इसका वीडियो भी बनाया गया है। एक अन्य किसान से भी निर्धारित राशि से अधिक पैसे लेने के आरोप लगाए जा रहे हैं। किसान के अनुसार, 27 हजार की खाद के बदले 28 हजार लिए गए। इतना ही नहीं, भुगतान दुकान संचालक के मोबाइल नंबर पर न कराकर कथित तौर पर कर्मचारी के मोबाइल नंबर पर ट्रांसफर करवाए जाने की बात भी सामने आई है।
वीडियो की जांच से सामने आ सकता है सच-
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य किसान द्वारा बनाया गया वीडियो और डिजिटल भुगतान का रिकॉर्ड हो सकता है। प्रशासन यदि वीडियो फुटेज, ई-टोकन रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर, बिक्री रजिस्टर, बिल तथा संबंधित मोबाइल नंबरों पर हुए भुगतान की जांच करे तो स्थिति स्पष्ट हो सकती है। अब निगाहें कृषि विभाग और जिला प्रशासन पर हैं कि वे किसान के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कराते हैं या नहीं।

 

 

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