सडक़ों पर पटाखा फोडऩे वाली बुलेट पर पुलिस का एक्शन, साइलेंसर निकलवाकर काटा चालान

सीहोर। शहर की सडक़ों पर तेज आवाज और पटाखों जैसा शोर मचाकर दहशत फैलाने वाले बुलेट चालकों के खिलाफ पुलिस ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार शुक्ला के निर्देशन में यातायात पुलिस ने विशेष चेकिंग अभियान चलाकर ऐसी बुलेट मोटरसाइकिलों को पकड़ा है, जिनमें कंपनी के असली साइलेंसर हटाकर अवैध मॉडिफाइड साइलेंसर लगाए गए थे।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुनीता रावत और नगर पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिनंदना शर्मा के मार्गदर्शन में यातायात प्रभारी सूबेदार बृजमोहन धाकड़ ने अपनी टीम के साथ शहर के प्रमुख चौराहों पर नाकेबंदी की। इस दौरान तीन बुलेट चालक मानक ध्वनि से कहीं अधिक शोर मचाते और साइलेंसर से पटाखों जैसी आवाज निकालते हुए पाए गए। पुलिस ने तत्काल इन वाहनों को रोककर जब्त किया और मौके पर ही इनके अवैध साइलेंसर निकलवा दिए। साथ ही यातायात नियमों के उल्लंघन के तहत भारी चालानी कार्रवाई भी की गई।
क्यों खतरनाक है मॉडिफाइड साइलेंसर
यातायात पुलिस ने वाहन चालकों को समझाइश देते हुए बताया कि बुलेट में कंपनी द्वारा निर्धारित साइलेंसर की जगह मॉडिफाइड साइलेंसर लगवाना न केवल अवैध है, बल्कि इसके कई गंभीर नुकसान भी हैं।
ध्वनि प्रदूषण: इन साइलेंसरों से निकलने वाली आवाज 100 डेसिबल से भी ऊपर चली जाती है, जो इंसानी कानों के लिए बेहद हानिकारक है।
हृदय रोगियों के लिए खतरा: अचानक होने वाली पटाखे जैसी आवाज से बुजुर्गों, बच्चों और हृदय रोगियों को दिल का दौरा पडऩे का खतरा रहता है।
दुर्घटना की आशंका: तेज आवाज के कारण सडक़ पर चल रहे अन्य वाहन चालक घबरा जाते हैं, जिससे संतुलन बिगडऩे और दुर्घटना होने की संभावना बढ़ जाती है।
इंजन पर बुरा असर: बिना कंपनी फिटेड साइलेंसर के गाड़ी चलाने से मोटरसाइकिल के इंजन की उम्र कम हो जाती है और ईंधन की खपत भी बढ़ जाती है।
पुलिस की चेतावनी, जारी रहेगी कार्रवाई
यातायात प्रभारी बृजमोहन धाकडढ़ ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने मैकेनिकों को भी सख्त हिदायत दी है कि वे वाहनों में अवैध साइलेंसर फिट न करें। यदि कोई भी वाहन चालक दोबारा इस तरह के हुड़दंग मचाते हुए पाया गया तो उसका वाहन राजसात करने और लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

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