Sehore News : गलती हो जाए तो प्रायश्चित जरूर करें : आचार्य देवेन्द्र व्यास

भागवत कथा में मनाया गया भगवान शिव और मॉ पार्वती का विवाहोत्सव

सीहोर। मनुष्य से गलती हो जाना बड़ी बात नहीं। लेकिन ऐसा होने पर समय रहते सुधार और प्रायश्चित जरूरी है। ऐसा नहीं हुआ तो गलती पाप की श्रेणी में आ जाती है। गलतियां हम सभी करते हैं। छोटे छोटी गलतियां करते हैं और बड़ों से बड़ी गलतियां हो जाया करती हैं। पर ऐसा नहीं है कि लोग जानबूझकर अपने लिए गढ्ढा खोदते हैं बल्कि कई बार हम अनजाने में ऐसा कुछ कर बैठते हैं जिससे जीवनभर अपराधबोध महसूस होता है। सभी धर्मों में पाप-पुण्य का महत्व है। उक्त विचार शहर के बड़ा बाजार स्थित अग्रवाल धर्मशाला में सात दिवसीय भागवत कथा के दूसरे दिन आचार्य देवेन्द्र राधेश्याम व्यास ने कहे। मंगलवार को कथा के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती का प्रसंग कर विवाहोत्सव मनाया गया।
आचार्य श्री व्यास ने कहा कि किसी के द्वारा किए गए सही और गलत कामों को पाप-पुण्य में बांटा जाता है। अनजाने में की गई गलतियों की सजा भले न मिले पर उसके परिणाम जरूर भुगतने पड़ते हैं। इसलिए हर धर्म में गलती होने पर उसके पश्चाताप के तरीके को सुझाया गया है। भागवत कथा श्रवण मात्र से पाप से मुक्ति मिलती। कहा जिस स्थान पर कथा होती है वहां भगवान विराजमान होते हैं। भगवन नाम के जाप से सारे विपत्ति नाश हो जाते हैं। इस जगत में भगवत कृपा के बिना कुछ भी संभव नहीं है। मनुष्य को समाज में अच्छे काम करना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है की कर्म ही प्रधान है, बिना कर्म कुछ संभव नहीं होता है, जो मनुष्य अच्छा व सत्कर्म करता है उसे अच्छा फल मिलता है व बुरे कर्म करने वाले को हमेशा बुरा फल मिलता है। इसलिए सभी को अच्छे कर्मो के प्रति आकृष्ट होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक मार्ग दमन का है तो दूसरा उदारीकरण का। दोनों ही मार्गो में अधोगामी वृत्तियां निषेध हैं। जैसे कि गोकर्ण ने कथा कही, किन्तु उसके दुराचारी भाई धुंधकारी ने मनोयोग से उसे सुना तो मोक्ष प्राप्त हो गया। भागवत कथा एक ऐसा अमृत है कि इसका जितना भी पान किया जाए आत्मा तृप्ति नहीं होती है। भागवत कथा सुनते ही ज्ञान और वैराग्य जाग जाए। कथा के दूसरे दिन यजमान धर्मेन्द्र ठाकुर, राजेश भूरा यादव, राकेश शर्मा, रामेश्वर सोनी सहित अन्य लोगों ने आचार्य श्री व्यास का स्वागत किया।

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