
सीहोेर। इन दिनों जिला मुख्यालय के समीपस्थ चितावलिया हेमा स्थित निर्माणाधीन मुरली मनोहर एवं कुबेरेश्वर महादेव मंदिर में हरदिन बड़ी संख्या में कावड़ लेकर महिला और पुरुष आदि कावड़ यात्री आ रहे हैं और पूरी आस्था और उत्साह के साथ यहां पर भगवान का जलाभिषेक का क्रम जारी है। इसी कड़ी में आगामी 31 जुलाई को शहर के सीवन नदी तट से कुबेरेश्वरधाम तक जाने वाली भव्य कावड़ यात्रा को लेकर शनिवार को धाम से लगे आधा दर्जन से अधिक ग्रामों के ग्रामीणों की एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में ग्राम नापलाखेड़ी, चितोडिया जाट, चितावलिया हेमा, चितावलिया लाखा, ग्राम भटौनी और दीदाखेड़ी सहित आधा दर्जन से अधिक ग्रामों के श्रद्धालुओं ने कोरोना काल के बाद सावन मास पर भव्य कावड़ यात्रा का आयोजन करने का निर्णय लिया है। इस बार की कावड़ यात्रा अपने आप में एक भव्य यात्रा रहेगी। इसमें सैकड़ों की संख्या में कांवड़िए शामिल होंगे। भगवा कपड़े पहने भक्तों के कंधे पर कांवड़ होगी। बोलबम के नारे के साथ कावड़िए शहर की जीवनदायनी सीवन नदी के तट पर पहुंचकर सुबह ग्यारह बजे शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए जिला मुख्यालय के समीपस्थ चितावलिया हेमा स्थित निर्माणाधीन मुरली मनोहर एवं कुबेरेश्वर महादेव मंदिर पहुंचेंगे। करीब 11 किलोमीटर से अधिक भव्य कावड़ा यात्रा का ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में उत्साह के साथ भव्य स्वागत किया जाएगा। कावड़ यात्रा के दौरान माता पार्वती के जल से मंदिर में भगवान शिव का भव्य जलाभिषेक किया जाएगा।
कथा का शुभारंभ 24 जुलाई को-
आज निकाली जाएगाी शोभा यात्रा-
प्रातःकाल जप, ध्यान, प्रार्थना करने से परमात्मा तुम्हें सारा दिन पाप कर्मों से बचाएंगे। प्रातःकाल भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीला का स्मरण करके देखो। सारा दिन आनंद में बीतेगा। जब जीवन में आनंद की प्राप्ति होगी तो समझना परमात्मा की कृपा हुई है, किंतु उस आनंद में स्वयं खुश होने और सुखी होने में दूसरों को दुखी मत करना। अपना स्वार्थ निहित मत करना, क्योंकि भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी बाल लीला में यही दिखाया है कि दूसरो को सूखी करने की इच्छा करने वाला कभी दुखी नहीं होता। भगवान श्रीकृष्ण पर माता रुकमणी को पूरा विश्वास था। वह आरंभ से ही भगवान के इच्छा करती आ रही थी, जिसके कारण अंत में भगवान से उनका विवाह हुआ। उक्त विचार शहर के बड़ा बाजार स्थित अग्रवाल धर्मशाला में जारी सात दिवसीय भागवत कथा में आचार्य पंडित देवेन्द्र राधेश्याम व्यास ने कहे। शनिवार को भागवत भूषण पंडित प्रदीप मिश्रा ने पहुंचकर आचार्य श्री व्यास का सम्मान किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि संत, साधु और गुरु का कार्य ही समाज को जाग्रत करने का है।