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भक्ति के रंग में रंगा सीहोर, करोली माता मंदिर में सहस्त्र चंडी महायज्ञ जारी

सीहोर। शहर के गंज क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध करोली वाली माता मंदिर में रविवार से भक्ति और शक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। गुप्त नवरात्रि के पावन अवसर पर यहां ऐतिहासिक सहस्त्र चंडी महायज्ञ का भव्य शुभारंभ हुआ। इस नौ दिवसीय अनुष्ठान की शुरुआत एक विशाल कलश यात्रा से हुई, जिसमें हजारों महिलाएं सिर पर मंगल कलश धारण कर शामिल हुईं। ढोल-नगाड़ों और जय माता दी के जयकारों के साथ निकली इस यात्रा ने पूरे शहर को धर्ममय कर दिया।
मीडिया प्रभारी प्रदीप समाधिया ने बताया कि यज्ञ की शास्त्रीय प्रक्रिया सोमवार सुबह 7 बजे से शुरू हुई। यज्ञाचार्य पंडित महादेव शर्मा के सानिध्य में अग्नि स्थापन किया गया। 108 से अधिक विद्वान ब्राह्मणों के मार्गदर्शन में प्रतिदिन नित्य पूजन, अभिषेक और हवन का क्रम चलेगा। कार्यक्रम के अध्यक्ष विवेक राठौर और मुख्य यजमान तरुण राठौर ने बताया कि यह महायज्ञ केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि पूरे विश्व के कल्याण और शांति की भावना से आयोजित किया जा रहा है।
क्या है सहस्त्र चंडी महायज्ञ, क्यों है यह इतना खास
शास्त्रों के अनुसार सहस्त्र चंडी महायज्ञ सबसे शक्तिशाली और दुर्लभ अनुष्ठानों में से एक माना जाता है।
दुर्गा सप्तशती का पाठ: इस यज्ञ में श्री दुर्गा सप्तशती के 1000 सहस्त्र पूर्ण पाठ किए जाते हैं।
शक्तियों का आह्वान: इसमें महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की संयुक्त शक्तियों का आह्वान होता है।
फलश्रुति: यज्ञाचार्य पंडित महादेव शर्मा के अनुसार यह यज्ञ असाध्य रोगों से मुक्ति, दरिद्रता का नाश, शत्रुओं पर विजय और ग्रह दोषों की शांति के लिए अचूक है। माना जाता है कि जिस स्थान पर यह यज्ञ होता है, वहां कई वर्षों तक सकारात्मक ऊर्जा का संचार बना रहता है।
9 दिनों तक बहेगी भक्ति की गंगा
संयुक्त मां कालका उत्सव समिति ने इस आयोजन को एक जन-उत्सव का रूप दिया है। महायज्ञ के दौरान 9 दिनों तक प्रतिदिन शाम को हवन-पूजन के बाद विशाल नगर भोज का आयोजन किया जा रहा है। समिति ने शहर के सभी श्रद्धालुओं से इस दिव्य आयोजन में शामिल होकर पुण्य लाभ लेने की अपील की है।

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