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शिवानी की मौत से आदिवासियों में आक्रोश, कलेक्ट्रेट में गूंजा ‘जय जोहार’

सीहोर। जिस मां ने अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए छोटा परिवार चुनने का फैसला किया, उसे सिस्टम की लापरवाही ने हमेशा के लिए अपनों से दूर कर दिया। भैरुंदा सरकारी अस्पताल की एक कथित सर्जिकल चूक ने न केवल 22 साल की शिवानी बारेला की जान ले ली, बल्कि उसके तीन छोटे बच्चों को अनाथ कर दिया। इस हृदयविदारक घटना से उपजे आक्रोश के बाद बुधवार को सैकड़ों आदिवासियों ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया।
गौरतलब है कि ग्राम सिंहपुर की रहने वाली शिवानी बारेला 12 जनवरी को खुशी-खुशी नसबंदी ऑपरेशन कराने अस्पताल पहुंची थी। आरोप है कि डॉ. रुकमणी गुलहारिया ने ऑपरेशन के दौरान बड़ी चूक करते हुए शिवानी के पेट की आंत काट दी। लापरवाही यहीं नहीं रुकी, ऑपरेशन के मात्र 7 घंटे बाद रात 10 बजे उसे जबरन डिस्चार्ज कर दिया गया।
घर पहुंचते ही बिगड़ी तबीयत
परिजनों के अनुसार घर पहुंचते ही शिवानी की हालत बिगडऩे लगी। परिजन उसे लेकर भोपाल के हमीदिया अस्पताल भागे, जहां डॉक्टरों ने बताया कि गलत ऑपरेशन की वजह से पेट में जहर (इन्फेक्शन) फैल चुका है। तीन दिन तक तड़पने के बाद 15 जनवरी को शिवानी की मौत हो गई। शिवानी अपने पीछे तीन मासूम बच्चों को छोड़ गई है, जिनके सिर से मां का साया हमेशा के लिए उठ गया है।
नाराज आदिवासियों की मांग
बुधवार को कलेक्ट्रेट परिसर जय जोहार और न्याय दो के नारों से गूँज उठा। समाज के नेताओं ने सरकार से मांग की है कि दोषी डॉक्टर को तत्काल बर्खास्त कर गिरफ्तार किया जाए। पीडि़त परिवार को 3 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए। तीनों अनाथ बच्चों की पढ़ाई, लिखाई और स्वास्थ्य का खर्च सरकार उठाए और उन्हें सरकारी नौकरी दी जाए। भैरुंदा अस्पताल में फौरन अच्छे डॉक्टर और आईसीयू की व्यवस्था की जाए।

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