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स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ आंकड़ों में नहीं, जमीन पर दिखना चाहिए: कलेक्टर

सीहोर। शासन की स्वास्थ्य योजनाओं की सफलता केवल कागजी आंकड़ों से नहीं, बल्कि आम जनता को मिलने वाली राहत से तय होगी। यह बात मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में कलेक्टर बालागुरू के. ने कहे। इस दौरान कलेक्टर ने जिले की स्वास्थ्य सेवाओं और राष्ट्रीय कार्यक्रमों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की।
कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे केवल दफ्तरों में न बैठें, बल्कि फील्ड विजिट कर जमीनी हकीकत जानें। उन्होंने दो टूक कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अस्पताल आने वाले किसी भी व्यक्ति को सुविधाओं के अभाव में परेशान नहीं होना चाहिए।
प्रमुख निर्देश और प्राथमिकताएं
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर जरूरी दवाइयों का स्टॉक हमेशा बना रहे। टीबी की रोकथाम के लिए मिशन मोड में काम हो। मरीजों की पहचान, जांच और उपचार समय पर सुनिश्चित किया जाए। नवजात शिशुओं और गर्भवती महिलाओं की देखभाल के लिए बनी इकाइयों में मानव संसाधन और उपकरणों की कमी न रहे। विकासखंड स्तर पर स्वास्थ्य अमले के काम की नियमित समीक्षा की जाए ताकि योजनाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचें।
जिले का स्वास्थ्य ढांचा
बैठक में बताया गया कि जिले की लगभग 16 लाख की आबादी के लिए ब्लड बैंक, पोषण पुनर्वास केंद्र और पीडियाट्रिक आईसीयू जैसी आधुनिक इकाइयां सक्रिय हैं। अप्रैल से दिसंबर 2025 तक की प्रगति रिपोर्ट में टीबी नोटिफिकेशन और निक्षय पोषण योजना के तहत डीबीटी वितरण की भी समीक्षा की गई। बैठक में सीएमएचओ डॉ. सुधीर कुमार डेहरिया सहित महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

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