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मावठे की मार और ‘इल्लियों’ का डर, बारिश के बाद किसानों के लिए कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी

सीहोर। जिले में मंगलवार रात से शुरू हुआ बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि का दौर थमने के बाद अब किसानों के सामने फसलों को कीटों और रोगों से बचाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। जहां एक ओर बारिश को असिंचित क्षेत्रों के लिए अमृत माना जा रहा है, वहीं कृषि विभाग ने चेतावनी दी है कि बदलते मौसम के कारण गेहूं और चने की फसल पर जड़ माहू और कठुआ इल्ली का हमला हो सकता है।
बता दें बुधवार सुबह पूरा जिला घने कोहरे की चादर में लिपटा रहा। आलम यह था कि सडक़ों पर विजिबिलिटी इतनी कम हो गई कि दिन में भी गाडिय़ों को हेडलाइट जलाकर चलना पड़ा। ठंडी हवाओं के कारण न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिससे ठिठुरन बढ़ गई है। जिले में सबसे ज्यादा 10 मिमी बारिश सीहोर केंद्र पर दर्ज की गई, जबकि बुदनी और रेहटी सूखे रहे।
कृषि विभाग की अलर्ट, फसल सूखने से बचाएं किसान
उप संचालक कृषि और कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने विकसित भारत संकल्प यात्रा के दौरान खेतों का भ्रमण कर किसानों को सतर्क किया है।
चने की फसल: वर्तमान में चना पुष्पन की अवस्था में है। धूप न निकलने के कारण प्रकाश संश्लेषण रुक गया है, जिससे फूल पीले होकर सूख रहे हैं। साथ ही सुंडी इल्ली और उकठा रोग का खतरा बढ़ गया है।
उपाय: किसान भाई इमामेक्टिन बेंजोएट प्रोफेनोफास 200 ग्राम प्रति एकड़ या एजोक्सीस्ट्रोबिन टेबुकोनाजोल का 150 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव करें।
गेहूं की फसल: गेहूं में जड़ माहू और कठुआ इल्ली के कारण बालियां प्रभावित हो रही हैं और फसल पीली पड़ रही है।
उपाय: इसके निदान के लिए इमामेक्टिन बेन्जोएट प्रोफेनोफास के साथ एनपीके 19:19:19 (1 किग्रा प्रति एकड़) का इस्तेमाल करें।
अभी और छाए रहेंगे बादल
मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटों तक जिले में बादल छाए रहेंगे और हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि खेतों में पानी जमा है तो उसे तुरंत निकालें ताकि जड़े न सड़ें। किसान किसी भी समस्या के लिए सीधे कृषि वैज्ञानिकों के संपर्क में रहें।

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