आशा-ऊषा कार्यकर्ताओं की हड़ताल, ठप रहा स्वास्थ्य मिशन का काम, कलेक्ट्रेट में गूंजी मांगें

सीहोर। केंद्र सरकार की श्रम नीतियों के विरोध और अपनी लंबित मांगों को लेकर गुरुवार को जिले भर की आशा-ऊषा कार्यकर्ताओं और पर्यवेक्षकों ने मोर्चा खोल दिया। देशव्यापी आह्वान पर एक दिवसीय हड़ताल पर रहीं इन कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री के नाम डिप्टी कलेक्टर जमील खान को ज्ञापन सौंपा। इस हड़ताल के कारण जिले में टीकाकरण, प्रसव पूर्व जांच और स्वास्थ्य जागरूकता जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कार्य बुरी तरह प्रभावित हुए।
प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार द्वारा लागू की जा रही काली श्रम संहिता की निंदा की। उनका कहना है कि ये कानून श्रमिक विरोधी हैं और इन्हें तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। कार्यकर्ताओं ने मांग की कि उन्हें योजना कर्मी के बजाय सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए और न्यूनतम वेतन, पेंशन, ग्रेच्युटी व सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाएं प्रदान की जाएं।
तीन महीने से मानदेय का इंतजार
ज्ञापन में कार्यकर्ताओं ने मध्य प्रदेश में भुगतान की दयनीय स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि सीहोर समेत अधिकांश जिलों में पिछले तीन महीनों से मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है। प्रोत्साहन राशि भी लंबे समय से बकाया है। कार्यकर्ताओं ने कहा हम फील्ड में नियमित काम करती हैं, लेकिन हमारे अधिकारों को लगातार नकारा जा रहा है।
कार्यकर्ताओं की प्रमुख मांगें
हर महीने की 5 तारीख तक वेतन और प्रोत्साहन राशि का भुगतान हो। केंद्र सरकार द्वारा बढ़ाई गई 1500 रुपए की राशि एरियर सहित दी जाए। ऑनलाइन काम के लिए बेहतर क्वालिटी के 5.जी मोबाइल टैब उपलब्ध कराए जाएं। चार श्रम संहिताओं को रद्द कर सभी को सरकारी कर्मचारी माना जाए।



