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कुबेरेश्वर धाम ड्यूटी से भैरूंदा तहसील का काम-काज ठप, नामांतरण और प्रमाण पत्रों के लिए भटक रहे ग्रामीण

सीहोर। प्रशासनिक तालमेल की कमी का खामियाजा इन दिनों भैरूंदा तहसील के आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। सीहोर के कुबेरेश्वर धाम में जारी महोत्सव के चलते तहसील के वरिष्ठ अधिकारियों की ड्यूटी वहां लगा दी गई है, जिसके कारण मुख्यालय पर राजस्व संबंधी महत्वपूर्ण कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं। तहसील कार्यालय में सन्नाटा पसरा है और दूर-दराज से आए ग्रामीण ‘साहब कब आएंगे’ का सवाल लिए खाली हाथ लौट रहे हैं।
बता दें कुबेरेश्वर धाम महोत्सव के लिए तहसीलदार सौरभ शर्मा और नायब तहसीलदार अनीस कुरैशी की ड्यूटी 20 फरवरी तक लगाई गई है। अधिकारियों के मुख्यालय से बाहर होने के कारण नामांतरण, फौती पत्ता, नक्शा दुरुस्ती, जन्म और जाति प्रमाण पत्र जैसे जरूरी काम फाइलों में दबकर रह गए हैं। हालांकि बाबू और कर्मचारी दफ्तर में मौजूद हैं, लेकिन अंतिम हस्ताक्षर और आदेश के अभाव में कोई भी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
अधूरे प्रभार और नेतृत्व का संकट
वर्तमान में तहसील का पूरा जिम्मा महिला अधिकारी आरती सोलंकी के कंधों पर है। सूत्रों की मानें तो उन्हें अब तक पूर्ण प्रशासनिक अधिकारों की औपचारिक अधिसूचना प्राप्त नहीं हुई है, जिससे वे केवल प्रभार की स्थिति में ही काम देख पा रही हैं। वहीं एसडीएम सुधीर कुशवाह के निजी कारणों से अवकाश पर होने के कारण प्रशासनिक निर्णय लेने की प्रक्रिया लगभग ठहर सी गई है।

आमजन की परेशानी, अटके बैंक लोन और छात्रवृत्ति
तहसील परिसर में अपने काम के लिए चक्कर काट रहे आवेदकों का दर्द छलक उठा है। कई किसानों और नागरिकों के बैंक लोन केवल नामांतरण न होने के कारण अटके हुए हैं। जाति प्रमाण पत्र समय पर न बनने से छात्रवृत्ति के आवेदन रुके हुए हैं।
परीक्षाओं पर असर
वर्तमान में बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं। एसडीएम और तहसीलदार को परीक्षा केंद्रों के निरीक्षण की जिम्मेदारी भी दी गई थी, लेकिन उनकी अनुपस्थिति में इन केंद्रों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़े सवाल
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का तर्क है कि धार्मिक आयोजनों में ड्यूटी लगाना जरूरी हो सकता है, लेकिन तहसील जैसे महत्वपूर्ण कार्यालय को बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के खाली छोडऩा आमजन के हितों के खिलाफ है। अगर इस बीच कोई बड़ा भूमि विवाद, दुर्घटना या आपातकालीन स्थिति पैदा होती है तो निर्णय कौन लेगा और जिम्मेदारी किसकी होगी।
ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन को तत्काल स्पष्ट प्रभार और अधिकारों की अधिसूचना जारी करनी चाहिए ताकि अटके हुए राजस्व कार्य सुचारू रूप से चल सकें और लोगों को बार-बार तहसील के चक्कर न काटने पड़े।

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