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होलिका दहन में जली ‘शराब की लत’…

सीहोर। बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व होली इस बार जिले के तीन गांव चंदेरी, रामाखेड़ी और कुंलास खुर्द के लिए केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि एक नए जीवन की शुरुआत बनकर आया। यहां के किसानों ने होलिका की पवित्र अग्नि में न केवल पारंपरिक लकडिय़ां जलाईं, बल्कि समाज को खोखला कर रही शराब की लत को हमेशा के लिए स्वाहा करने का संकल्प लिया।
समाजसेवी और किसान नेता एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में आयोजित इस अनूठे कार्यक्रम में सैकड़ों किसान एकजुट हुए। परंपरा के अनुसार जब होलिका की अग्नि प्रज्वलित हुई तो किसानों ने प्रतीकात्मक रूप से नशे और शराब की बुराई को उसमें समर्पित किया। इसके बाद सामूहिक रूप से हाथ उठाकर शपथ ली कि आज के बाद हम कभी शराब नहीं पिएंगे और अपने परिवार व समाज को नशा मुक्त रखेंगे।
किसानों का दर्द और बदलाव की हुंकार
कार्यक्रम में शामिल किसानों ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि कैसे शराब ने उनके खुशहाल परिवारों को कर्ज और बर्बादी की कगार पर खड़ा कर दिया है। कुलांसखुर्द के किसान रमेश चंद्र वर्मा ने बताया कि दिनभर की मेहनत की कमाई शराब में उड़ जाती थी, आज हमने नई शुरुआत की है। रामाखेड़ी के किसान मोतीलाल ने बताया कि गांव के कई परिवार शराब के कारण कर्ज में डूबे हैं, यह पहल उन्हें नई दिशा देगी।
गूंजे नशामुक्ति के नारे
इस दौरान पूरा वातावरण नशा छोड़ो, जीवन जोड़ो और श्नशा मुक्त गांव बनाओ के नारों से गूंज उठा। समाजसेवी एमएस मेवाड़ा ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि यह शपथ केवल शब्द नहीं, बल्कि जीवन बदलने का संकल्प है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और अन्य गांवों को भी इससे जोड़ा जाएगा।
समाज के लिए बनी मिसाल
सीहोर के इन किसानों की यह पहल अब एक सामाजिक मॉडल के रूप में देखी जा रही है। जहां लोग होली पर नशे में डूबे रहते हैं, वहीं इन तीन गांवों ने नशा त्यागने का उदाहरण पेश कर पूरे प्रदेश को एक बड़ा संदेश दिया है। इस अवसर पर राम सिंह मेवाड़ा, अचल सिंह, पदम सिंह, बटन सिंह और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

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