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शराब’ से 350 करोड़ का लक्ष्य, 317 करोड़ ही अब तक ’जमा’

सीहोर जिले में घाटा का सौदा बनी शराब दुकानें, बकतरा-2 के नहीं मिले कोई ठेकेदार

सीहोर। सरकार का शराब की आय से खजाने भरने का लक्ष्य पूरा नहीं हो रहा, क्योंकि शराब की दुकानें घाटे का सौदा बन गईं हैं। सीहोर जिले में वर्ष 2026-27 के लिए 350 करोड़ रूपए का लक्ष्य तय किया गया है, लेकिन अब तक 317 करोड़ रूपए ही शराब दुकानों की नीलामी से आए हैं, जबकि जिले के बकतरा की एक दुकान को अब भी ठेकेदार का इंतजार है। पहले यह दुकान नीलाम हो चुकी थी, लेकिन ठेकेदार ने अब तक इसकी राशि जमा नहीं कराई। इसके कारण इस दुकान को फिर से नीलामी के लिए रखा गया है।
राजधानी से सटे सीहोर जिले में वर्ष 2026-27 के लिए शराब दुकानों से 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 350 करोड़ रूपए का लक्ष्य तय किया गया था। गत वर्ष यह लक्ष्य 292 करोड़ रूपए का था, लेकिन इस वर्ष तय लक्ष्य तक विभाग नहीं पहुंच सका है। ऐसे में सरकार का खजाना भी खाली रहेगा। उम्मीद थीं कि शराब दुकानों से यह आय होगी, लेकिन जिले में शराब के धंधे की मोनोपॉली अलग तरीके की है। ऐसे में यह लक्ष्य प्राप्त नहीं हो सका। यहां बता दें कि जिले की प्रमुख दुकानें पहले ही ऑक्शन हो चुकी थीं। इन प्रमुख दुकानों के लिए जो राशि तय की गई थी उससे बहुत कम दर पर इनकी बोलियां लगीं, ऐसे में पहले से ही राजस्व की कमी बनी रही। जिले की ज्यादातर दुकानों के लिए मेसर्स गेंदालाल हजारीलाल एंड कंपनी द्वारा बोलियां लगाई गईं। बकतरा की दुकानों के लिए अलग-अलग ठेकेदारों ने बोलियां लगाईं, जिसमें से दुकान-2 की राशि अब तक जमा नहीं हुई है। विभाग ने इसे फिर से नीलामी के लिए खुला रखा है।
कम दर पर देनी पड़ी दुकानें
सीहोर जिले की प्रमुख दुकानों की नीलामी पहले ही चरण में हो गई थी। ये वे दुकानें हैं, जिनसे ठेकेदारों को भी अच्छी कमाई होती है। ऐसे में उन्होंने मुख्य दुकानों को पहले ही ऑक्शन में रख लिया। इसके बाद जिले की वे दुकानें जो कमाई के मामले में फिसड्डी है उनके लिए बेहद कम दर पर बोलियां लगाईं। इन दुकानों में बिलकिसगंज, आमला, श्यामपुर सहित अन्य दुकानें हैं। डोबी और बकतरा की दुकानों की बोलियां महेश यादव व रमेश यादव ने लगाईं थीं। बकतरा की एक दुकान 5,71,11,111 एवं दूसरी दुकान 5,21,11,111 में नीलाम हुईं, लेकिन बकतरा-2 के पैसे अब तक जमा नहीं हुए।
ये रही वर्षवार आय की स्थिति
– वर्ष 2020-21 में 180 करोड़
– वर्ष 2023-24 में 227 करोड़
– वर्ष 2024-25 में 246 करोड़
– वर्ष 2025-26 में 292 करोड़

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