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दावा बनाम हकीकत: कागजों पर सुरक्षित मातृत्व, हकीकत में अस्पताल के पीछे झोपड़ी में प्रसूता का दर्द

अस्पताल में नहीं मिला स्टाफा, नर्स ने किया रेफर, मजबूरी में रिश्तेदार की झोपड़ी में हुई डिलीवरी

सीहोर। प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं को बेहतर इलाज और संस्थागत प्रसव (अस्पताल में डिलीवरी) के लाख दावे कर ले, लेकिन जिले के सिद्धिकगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से सामने आई तस्वीर शर्मसार करने वाली है। यहां एक प्रसूता को अस्पताल में भर्ती करने के बजाय भगा दिया गया, जिसके बाद उसे अस्पताल के पीछे एक झोपड़ी में अपनी बच्ची को जन्म देना पड़ा।
बता दें ग्राम श्यामपुर मगरदा निवासी दिनेश बारेला ने बताया कि गुरुवार-शुक्रवार की दरम्यानी रात उनकी पत्नी संजू को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। सुबह 6 बजे जब वे सिद्धिकगंज स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे तो वहां कोई स्टाफ नहीं था। काफी मशक्कत के बाद जब नर्स आई तो उसने प्रसूता को भर्ती करने के बजाय आयरन-कैल्शियम की कमी बताकर आष्टा रेफर कर दिया।
झोपड़ी में जन्म
दर्द से तड़पती महिला को लेकर परिजन कहीं और जाने की स्थिति में नहीं थे। मजबूरी में उसे अस्पताल से महज 500 मीटर दूर एक रिश्तेदार की झोपड़ी में ले जाया गया। सुबह 7.30 बजे परिजन महिलाओं की मदद से वहां डिलीवरी हुई। डिलीवरी के बाद जब परिजन इलाज के लिए दोबारा अस्पताल पहुंचे तो स्टाफ ने उन्हें यह कहकर भगा दिया कि ष्डिलीवरी से पहले लाते तब फायदा मिलता।
कागजी दावाा, गिना रहे सफलता
विडंबना देखिए कि जिस दिन यह घटना सामने आई उसी दिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान की सफलता गिना रहे थे। दावा है कि जिले में 9 मई को 789 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई और हाई रिस्क महिलाओं की पहचान की गई। सीएमएचओ डॉ. सुधीर डेहरिया के अनुसार महिलाओं को निशुल्क जांच, दवा और पिक अप एवं ड्रॉप की सुविधा दी जा रही है।
भ्रष्टाचार और रेफर का खेल
बता दें सिद्धिकगंज क्षेत्र के लगभग 70 गांवों के आदिवासी ग्रामीण इस केंद्र पर निर्भर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि यहां बिना पैसों के कोई काम नहीं होता। डिलीवरी होने पर पैसों की मांग की जाती है और अधिकांश मामलों को आष्टा या सीहोर रेफर कर दिया जाता है। अस्पताल में केवल दो नर्स हैं जो अक्सर ड्यूटी से नदारद रहती हैं। सुविधाओं के अभाव में गरीब ग्रामीण निजी अस्पतालों में लुटने को मजबूर हैं।
जिम्मेदारों का जवाब
मुझे इस मामले की जानकारी नहीं है। मैं इसकी गंभीरता से जांच करवाता हूं। यदि लापरवाही पाई गईए तो संबंधित कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अमित माथुर, बीएमओ आष्टा

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