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बजट के अभाव में सिसक रहा अनाथ बच्चों का बचपन

जिले के 575 मासूम बच्चों के खातों में नहीं पहुंची मदद

सीहोर। अनाथ, निराश्रित और बेसहारा बच्चों के सिर पर सुरक्षित आशियाना, शिक्षा और संरक्षण का हाथ रखने के उद्देश्य से शुरू की गई सरकार की महत्वाकांक्षी मिशन वात्सल्य योजना इन दिनों खुद आर्थिक संकट के दौर से गुजर रही है। बजट के अभाव में बीते तीन महीनों से इन मासूम बच्चों के खातों में सहायता राशि नहीं पहुंच पाई है। नतीजा यह है कि अपनों को खो चुके इन बच्चों की परवरिश अब दाने-दाने को मोहताज होने लगी है। जिन कंधों पर इन अनाथ बच्चों की जिम्मेदारी है, वे सरकार की तरफ टकटकी लगाए बैठे हैं, लेकिन व्यवस्था के इस सन्नाटे ने उनके सामने कई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
बता दें महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित इस स्पॉन्सरशिप योजना के तहत पंजीकृत बच्चों के पालकों या संरक्षकों के खातों में हर महीने 4 हजार रुपए की सहायता राशि भेजी जाती है। इस राशि का मकसद बच्चों के लिए दो वक्त की रोटी, पढ़ाई और बेहतर माहौल की व्यवस्था करना है। लेकिन पिछले तीन महीनों से यह मदद थमी हुई है। एक पीडि़त बच्चे के बुजुर्ग संरक्षक ने नम आंखों से अपना दर्द बयां करते हुए कहा एक तो माता-पिता का साया पहले ही उठ गया, ऊपर से कमरतोड़ महंगाई ने जीना दुश्वार कर दिया है। राशन से लेकर पढ़ाई की चीजें तक महंगी हो गई हैं। अगर सरकार की यह मदद समय पर मिल जाती तो बच्चों का पेट पालना आसान हो जाता। अब उधारी के सहारे दिन काटने पड़ रहे हैं।
जिले के 575 मासूम अब भी मदद से महरूम
आंकड़ों की बात करें तो सीहोर जिले में इस स्पॉन्सरशिप योजना के तहत कुल 1840 लाभार्थी बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें से 124 बच्चे ऐसे हैं, जिनके माता और पिता दोनों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि 70 बच्चे दिव्यांग श्रेणी में आते हैं। इनमें से 375 बच्चे अपने दूर के रिश्तेदारों या संरक्षकों के पास रह रहे हैं और कई बच्चे अपनी एकल मां (सिंगल पेरेंट) के सहारे पल रहे हैं। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक आखिरी बार 11 मई 2026 को जिले के 1,265 बच्चों को तो सहायता राशि मिल गई थी, लेकिन बजट की कमी के चलते 575 मासूम बच्चे इस आर्थिक सहायता से पूरी तरह महरूम रह गए।
बजट आते ही खातों में भेजी जाएगी राशि
इस संवेदनशील और गंभीर मामले को लेकर जब महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला अधिकारी ज्ञानेश खरे से बात की गई तो उन्होंने बताया कि इस बार केंद्र सरकार से योजना का आवश्यक बजट प्राप्त नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे विभाग के पास बजट उपलब्ध होता है, बच्चों के खातों में राशि ट्रांसफर कर दी जाती है। कई बार बजट आने पर बच्चों के खातों में पिछले महीनों की इक_ा राशि भी एक साथ डाल दी जाती है। विभाग लगातार प्रयास कर रहा है कि जल्द से जल्द बजट मिले ताकि बच्चों की पढ़ाई और परवरिश प्रभावित न हो।

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