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रेलवे ठेकेदार बना रहे तालाबों को ’मौत का कुआं’!

- रेहटी, बुधनी तहसील की ग्राम पंचायतों से रेलवे निकाल रहा अवैध मिट्टी

सीहोर। जिले की बुधनी से इंदौर तक डाली जा रही नई रेलवे लाईन में नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। रेलवे ठेकेदार मनमाने तरीकों से काम कर रहे हैं। जिले की बुधनी और रेहटी तहसील की कई ग्राम पंचायतों में रेलवे द्वारा तालाबों से मिट्टी निकाली जा रही है। रेलवे तय मापदंड से कई गुना मिट्टी निकालकर इन तालाबों को ’मौत का घर’ बना रहा है। सूत्र बता रहे हैं कि जनपद पंचायत कार्यालय द्वारा पंचायतों के तालाबों को खोदने के लिए अनुमति नहीं दी गई, लेकिन ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने रेलवे ठेकेदारों से सांठ-गांठ करके तालाबों को बहुत ज्यादा गहरा करवा दिया। ग्राम पंचायत इटारसी के गांव मकोड़िया में तो ग्राम पंचायत ने 70 फिट तालाब खोदने की अनुमति दे डाली। मकोड़िया तालाब को रेलवे ठेकेदार ने बहुत गहरा करवा दिया। इसमें अब पशुओं के साथ ही लोगों के डूबने का खतरा ज्यादा बढ़ गया है।
जल गंगा संवर्धन अभियान की आड़ में खेल-
रेलवे द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान की आड़ में तालाबों को बेहिसाब खोद दिया गया। ग्राम पंचायतों ने भी अभियान की आड़ में अपना खेल कर लिया। नाम नहीं छापने की शर्त पर ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम पंचायतों के जिम्मेदारों ने रेलवे से सांठ-गांठ करके बेहिसाब तालाबों को खुदवा दिया है। अब यदि इन तालाबों में पशु एवं लोग डूबेंगे तो इनके जिम्मेदार कौन रहेंगे। बताया जा रहा है कि पंचायतों से दी गई अनुमतियों में मिट्टी के बदले तालाबों के आसपास पौधरोपण का कार्य कराया जाना प्रस्तावित है, लेकिन इसके पीछे बड़ी सांठ-गांठ भी पंचायतों द्वारा की गई है। पिछले दिनों रेहटी तहसील के ग्राम मांजरकुई में भी ऐसा ही मामला सामने आया था। इसमें पंचायत के जिम्मेदारों ने सांठ-गांठ करके तालाब को खोदने की अनुमति दे दी, जबकि ग्रामीण इसके पक्ष में नहीं थे।
70 फिट खोदने की दे डाली अनुमति-
ग्राम पंचायत इटारसी के ग्र्राम मकोड़िया में स्थित तालाब को तो रेलवे ठेकेदार ने बहुत ज्यादा ही गहरा कर दिया है। यह तालाब गांव से ही लगा हुआ है। गर्मी के दिनों में इसमें कई लोग नहाते भी हैं। ग्राम पंचायत इटारसी के सरपंच प्रतिनिधि भागीरथ मंडलोई से चर्चा की तो उन्होंने पहले तो बात करने में ही ऐतराज जताया। वे बोले कि सब लोग इस तालाब के पीछे ही क्यों पड़े हैं। इसके बाद उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत से 70 फिट तालाब खोदने की अनुमति दी गई है और अब तक करीब 30 फिट ही खुदा है, जबकि नियमानुसार इतनी अनुमति दी ही नहीं जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि गांव के लोग पानी को तरस रहे हैं, इसलिए ज्यादा गहरा होने से गांव में पानी का स्त्रोत भी बना रहेगा। उन्होंने बताया कि इसकी जानकारी विधायक रमाकांत भार्गव एवं युवा नेता कार्तिकेय सिंह चैहान को भी है, जबकि स्थानीय जनप्रतिनिधि विधायक एवं युवा नेता कार्तिकेय सिंह चैहान को लगातार गलत फीडबैक देकर भ्रमित कर रहे हैं। ऐसा ही तालाब की खुदाई को लेकर भी हुआ है।
ये कहते हैं नियम-
मध्यप्रदेश की ग्राम पंचायतों में तालाब गहरीकरण के लिए मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993, राजस्व विभाग के निर्देशों तथा संबंधित योजनाओं के प्रावधानों के अनुसार किया जाता है। इसमें ग्राम पंचायत का प्रस्ताव बेहद जरूरी है। तालाब गहरीकरण का प्रस्ताव ग्राम पंचायत की बैठक में पारित होना चाहिए। गहरीकरण केवल तालाब की जल क्षमता बढ़ाने के लिए किया जा सकता है। खनन नहीं किया जा सकता। गहरीकरण के नाम पर मिट्टी या मुरम का व्यावसायिक उत्खनन या बिक्री नहीं की जा सकती। यदि निकाली गई मिट्टी का व्यावसायिक उपयोग किया जाना है तो खनिज नियम लागू होना जरूरी है।
सलकनपुर तालाब को नहीं खोदने दिया-

एक तरफ मकोड़िया तालाब को तय मापदंड से कई गुना अधिक खोद दिया गया है, जबकि रेहटी तहसील के सलकनपुर में स्थित तालाब को खोदने ही नहीं दिया गया। तालाब खोदने की अनुमति ग्राम पंचायत सलकनपुर द्वारा दी गई थी, लेकिन अधिकारियों के दबाव के बाद यह तालाब नहीं खुद सका।
जबाव देने से बच रहे जिम्मेदार-
इस मामले में रेलवे के अधिकारी, राजस्व, जनपद पंचायत सहित खनिज विभाग के जिम्मेदार जबाव देने से बच रहे हैं। कोई भी स्थिति से अवगत कराने को तैयार नहीं है।
कांग्रेस ने साधा निशाना-
इस मामले में युवा नेता एवं सचिव मप्र कांग्रेस कमेटी विक्रम मस्ताल शर्मा हनुमानजी ने कहा कि बुधनी विधानसभा में जमकर अवैध मिट्टी की खुदाई चल रही है। बुधनी और रेहटी तहसील की ग्राम पंचायतों में तालाबों को बेहरमी से खोदा जा रहा है। गर्मी के दिनों में इन तालाबों में लोग नहाते हैं, पशु भी पशु भी पानी पीते हैं, ऐसे में कई हादसे होंगे। प्रशासन को इन तालाबों की खुदाई बंद करवाना चाहिए।

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