रूद्रधाम आश्रम के बड़े गुरूजी श्रीश्री1008 परमानंद परमहंस हुए ब्रह्मलीन, दी गई समाधि
128 वर्ष थी आयु, बचपन में ही छोड़ दिया था घर-परिवार

रेहटी। तहसील के रमगढ़ा स्थित रूद्रधाम आश्रम के बड़े गुरूजी श्रीश्री1008 श्री परमानंद परमहंस जी महाराज ने करीब 128 वर्ष की आयु में अपनी देह त्याग दी और ब्रह्मलीन हो गए। उन्होंने अपनी देह बरमान घाट के समीप अपने आश्रम में त्यागी। इस समाचार से क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। उनकी पार्थिव देह सोमवार को रमगढ़ा स्थित रूद्रधाम आश्रम में लाई गई। यहां पर उनके शिष्य एवं आसपास के क्षेत्र के लोगों ने उनके अंतिम दर्शन किए। इस दौरान बैंड बाजों के साथ उनकी यात्रा निकाली गई। इसके बाद उनकी पार्थिव देह मरदानपुर स्थित आश्रम में लाई गई। यहां पर उनको समाधि दी गई। श्री परमानंद परमहंस जी महाराज ने रूद्रधाम आश्रम की स्थापना में अहम भूमिका निभाई। उनकी उपस्थिति हमेशा से क्षेत्र के लिए सुखदायक एवं लाभदायक रही। समाधि लेने के दौरान बड़ी संख्या में क्षेत्र के साधु संत, महात्मा, जनप्रतिनिधि सहित आमजन मौजूद रहे।
महान संत एवं आध्यात्मिक गुरू थे
1008श्रीश्री परमहंस परमानंद जी महाराज एक महान संत और आध्यात्मिक गुरु थे। वे ज्यादातर समय अपनी साधना में लीन रहते थे। बताया जाता है कि उनका जन्म उत्तरप्रदेश के देवरिया जिले के रामकोला गांव में एक साधारण परिवार में हुआ था। उनका बचपन से ही अध्यात्मक की ओर झुकाव था, इसलिए उनको बेहद कम उम्र में ही घर-परिवार छोड़कर सन्यास धारण कर लिया था। बताया जाता है कि उन्होंने उत्तराखंड, चित्रकूट सहित कई घने जंगलों में बैठकर साधना एवं तप किया। वे रूदधाम आश्रम में भी ज्यादातर समय अपनी तपस्या में लीन रहते थे। उनके शरीर त्यागने से क्षेत्र में शोक की लहर फैली हुई है।



