60 साल पहले प्लेग की महामारी से रक्षा के लिए मांगी थी मन्नत, चिंतामन गणेश मंदिर में आज भी जारी है साहू परिवार की महाभंडारे की परंपरा

सीहोर। शहर के ऐतिहासिक एवं प्रसिद्ध चिंतामन गणेश मंदिर में गणेशोत्सव के तीसरे दिन भी श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है। बप्पा के दरबार में आने वाले भक्त जहां उल्टा स्वास्तिक बनाकर अपनी मन्नतें मांग रहे हैं, वहीं इस मंदिर से जुड़ी एक ऐसी ऐतिहासिक परंपरा भी है जो छह दशकों से अटूट विश्वास के साथ चली आ रही है। लगभग 60 से 70 साल पहले सीहोर और आसपास के इलाकों में फैली भीषण प्लेग महामारी के खात्मे की खुशी में शुरू हुआ महाभंडारा आज भी हर गणेश चतुर्थी और गणेशोत्सव के दौरान पूरी श्रद्धा के साथ आयोजित किया जाता है।
दशकों पहले सीहोर और आसपास के क्षेत्रों में जानलेवा बीमारी प्लेग ने भयंकर तबाही मचाई थी। चारों तरफ फैले इस खौफ के कारण लोग महामारी से बचने के लिए शहर छोडक़र पलायन करने को मजबूर हो रहे थे। उस विकट परिस्थिति में सीहोर मंडी के साहू परिवार के पूर्वज श्री रामलाल साहू ने हिम्मत नहीं हारी और शहर छोडक़र जाने के बजाय भगवान चिंतामन गणेश की शरण में जाने का फैसला किया।
साहू परिवार ने ली थी महाभंडारे की मन्नत
श्री रामलाल साहू ने पूरी निष्ठा और श्रद्धा से भगवान गणेश के सामने प्रार्थना की और मन्नत रखी कि यदि यह जानलेवा बीमारी शहर से खत्म हो जाती है और सभी लोग सुरक्षित रहते हैं तो वे हर माह की गणेश चतुर्थी पर महाभंडारे का आयोजन करेंगे। भगवान चिंतामन की कृपा से धीरे-धीरे सीहोर से प्लेग का प्रकोप पूरी तरह समाप्त हो गया और साहू परिवार समेत पूरा शहर इस महामारी से सुरक्षित हो गया।

60 साल बाद भी जारी है परंपरा
मन्नत पूरी होने के बाद रामलाल साहू और उनके परिवार ने मंदिर परिसर में महाभंडारे की शुरुआत की। साहू परिवार द्वारा शुरू की गई यह ऐतिहासिक परंपरा आज 60 साल बाद भी सीहोर के चिंतामन गणेश मंदिर में उसी अटूट श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है। हर साल गणेशोत्सव और हर माह आने वाली गणेश चतुर्थी के अवसर पर यहां विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुँचकर महाप्रसाद ग्रहण करते हैं।



