राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा का यह कैसा न्याय…
शराब दुकान हटाने की गुहार लगाने वाली महिला से बोले, पति को थाने में बंद करवा देंगे

सीहोर। जनता की समस्याएं सुनना और उनका मौके पर समाधान करना, सरकार के इस दावे की सीहोर जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। सीहोर विकासखंड के ग्राम महोडिय़ा में आयोजित मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के जिला स्तरीय शिविर में जब कुछ महिलाएं अपने गांव से शराब का ठेका हटाने की गुहार लेकर प्रदेश के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा के पास पहुंचीं, तो उन्हें न्याय और आश्वासन के बजाय मंत्री के गुस्से और धमकी का सामना करना पड़ा।
मंत्री महोदय ने महिलाओं की फरियाद सुनने के बजाय उलटा यह कह दिया कि पति को थाने में बंद करवा देंगे। इस अनोखे और विवादित न्याय का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और चारों तरफ एक ही सवाल गूंज रहा है, आखिर यह कैसा न्याय है।
शराब के ठेके से त्रस्त हो चुकी हैं गांव की महिलाएं
मामला इछावर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम महोडिय़ा का है, जहां संचालित शराब दुकान से ग्रामीण महिलाएं बेहद परेशान हैं। महिलाओं का कहना है कि गांव में शराब दुकान खुलने के कारण पूरा माहौल खराब हो रहा है। आए दिन आपसी विवाद और झगड़े की स्थिति बनती है, जिसके चलते कई परिवारों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति बदतर होती जा रही है।
इसी गंभीर समस्या से अपने गांव को मुक्त कराने और शराब का ठेका बंद करवाने की उम्मीद लेकर महिलाएं जनविश्वास अभियान के शिविर में पहुंची थीं। उन्हें पूरा भरोसा था कि प्रदेश के वरिष्ठ मंत्री और स्थानीय विधायक होने के नाते करण सिंह वर्मा उनकी पीड़ा को समझेंगे और तत्काल प्रशासनिक अधिकारियों को उचित कार्रवाई के निर्देश देंगे।
फरियाद सुनने के बजाय मंत्री जी हो गए आगबबूला
लेकिन इसके उलट जब महिलाओं ने मंत्री के सामने अपनी बात रखी तो वहां का दृश्य बिल्कुल विपरीत निकला। वायरल वीडियो के मुताबिक राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा महिलाओं की बात सुनकर भडक़ उठे। उन्होंने समस्या का समाधान करने या सांत्वना देने के बजाय तल्ख लहजे में महिला से यहां तक कह दिया कि वह उसके पति को थाने में बंद करवा देंगे।
एक जिम्मेदार मंत्री के मुंह से इस तरह के शब्द और धमकी सुनकर वहां मौजूद लोग भी अचरज में पड़ गए। जिस जनसुनवाई कार्यक्रम का उद्देश्य ही जनता का विश्वास जीतना और उनकी समस्याओं का निराकरण करना था, उसी मंच पर इस तरह का बर्ताव अब चर्चा का विषय बन गया है।
मंच पर मौजूद रहे आला अधिकारी
हैरानी की बात यह है कि जब यह पूरा घटनाक्रम घटा, तब मंच और पंडाल में जिले के तमाम प्रशासनिक और पुलिस विभागों के बड़े अधिकारी मौजूद थे। कार्यक्रम में कई नेता व अधिकारी उपस्थित थे। बावजूद इसके किसी ने भी महिलाओं की इस पीड़ा पर ध्यान देने के बजाय मंत्रीजी के सुर में सुर मिलाए या खामोश रहना ही बेहतर समझा।



