राजनीतिक

कांग्रेस में फूट से मची भगदड़? बाजवा के भाई और सिद्धू के करीबी विधायक भाजपा में शामिल

चंडीगढ़
अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पंजाब कांग्रेस को झटका देते हुए उसके दो मौजूदा विधायक मंगलवार को भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा में शामिल होने वाले विधायकों में फतेह जंग बाजवा और बलविंदर सिंह लड्डी हैं। जहां बाजवा कादियान से मौजूदा विधायक हैं तो वहीं लड्डी श्री हरगोबिंदपुर से विधायक हैं। दोनों मंगलवार को नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए। इन दोनों नेताओं के चुनाव से ठीक पहले पार्टी छोड़ने से एक बार फिर पंजाब कांग्रेस की कलह खुलकर सामने आ गई।

नवजोत सिंह सिद्धू ने किया था दोनों विधायकों की उम्मीदवारी का समर्थन
फतेह जंग पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद प्रताप सिंह बाजवा के भाई हैं। वहीं लड्डी भी बाजवा खेमे से ताल्लुक रखते हैं। दोनों भाजपा के पंजाब चुनाव प्रभारी और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की मौजूदगी में बीजेपी में शामिल हुए। दिलचस्प बात यह है कि पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू ने पिछले हफ्ते हुई राजनीतिक रैलियों में इन दोनों विधायकों की उम्मीदवारी का जोरदार समर्थन किया था।

पंजाब कांग्रेस में क्यों मची भगदड़?
बड़े भाई प्रताप सिंह बाजवा के कादियान से विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर करने से फतेह जंग नाराज हो गए थे। प्रताप के साथ इस खींचतान के बीच नवजोत सिंह सिद्धू ने फतेह जंग की उम्मीदवारी का समर्थन किया था। अब माना जा रहा है कि इस निर्वाचन क्षेत्र में दो भाइयों के बीच चुनावी जंग देखी जा सकती है, क्योंकि प्रताप बाजवा कथित तौर पर वहां से चुनाव लड़ने के लिए उत्सुक हैं। बता दें कि फतेह जंग और लड्डी दोनों पहली बार विधायक बने हैं। दरअसल हाल ही में एक रैली में, कांग्रेस के पंजाब अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने कादियान से फतेह जंग को पार्टी का उम्मीदवार घोषित कर दिया था। हालांकि, उस घोषणा के तुरंत बाद, प्रताप बाजवा ने अपनी पार्टी को स्पष्ट कर दिया कि उनकी भी उसी सीट पर दिलचस्पी है। खबरों की मानें तो फतेह जंग ने यह अनुमान लगाते हुए कि वह टिकट पाने की रेस में अपने भाई प्रताप बाजवा से हार जाएंगे इसलिए उन्होंने चुनाव से पहले पार्टी बदलने का विकल्प चुना। अब चूंकि सिद्धू पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष हैं इसलिए प्रताप बाजवा को कादियान से टिकट मिलने को लेकर पार्टी में फिर खींचातान हो सकती है। फिलहाल इस सबके बीच प्रताप बाजवा साइडलाइन महसूस कर रहे हैं जिनके टिकट को लेकर पार्टी की तरफ से आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

अमरिंदर सिंह के वफादार हैं तीनों विधायक
कांग्रेस के एक अन्य विधायक राणा गुरमीत सोढ़ी पिछले हफ्ते भाजपा में शामिल हुए थे। संयोग से, तीनों विधायक कांग्रेस के पूर्व नेता अमरिंदर सिंह के वफादार हैं, जिन्होंने पिछले दिनों इस्तीफा दे दिया और अपनी पार्टी शुरू की है। लेकिन वे अमरिंदर सिंह के नए संगठन पंजाब लोक कांग्रेस के बजाय भाजपा में शामिल हो गए। बीजेपी ने अमरिंदर सिंह और सुखदेव सिंह ढींडसा के साथ अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन किया है।

टिकट बंटवारे को लेकर चन्नी और सिद्धू में खींचतान?
ऐसी खबरें हैं कि टिकट बंटवारे को लेकर चन्नी और सिद्धू में बात नहीं बन रही है। पार्टी की आंतरिक कलह उस समय सामने आ गई जब पीपीसीसी प्रमुख नवजोत सिद्धू ने रविवार को बटाला रैली में पूर्व विधायक अश्विनी सेखरी को बटाला से कांग्रेस का उम्मीदवार घोषित कर दिया जबकि पार्टी ने अभी तक उम्मीदवारों की सूची जारी ही नहीं की है। सिद्धू की घोषणा से मंत्री त्रिपत राजिंदर बाजवा नाराज हो सकते हैं जो बटाला सीट पर नजर गड़ाए हुए हैं।

इन लोगों ने भी थामा भाजपा का दामन
पूर्व क्रिकेटर दिनेश मोंगिया और तीन बार के शिरोमणि अकाली दल के बलुआना से विधायक गुरतेज सिंह गुढियाना भी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुए। इसके अलावा संगरूर के पूर्व सांसद राजदेव खालसा, यूनाइटेड क्रिश्चियन फ्रंट पंजाब के अध्यक्ष कमल बख्शी, निहाल सिंह वाला नगर निगम सदस्य जगदीप सिंह धालीवाल और पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में सेवानिवृत्त एडीसी और अधिवक्ता मधुमीत भी भाजपा में शामिल हो गए।

 

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