Newsआष्टाइछावरजावरनसरुल्लागंजबुदनीरेहटीसीहोर

70 वर्षीय बुजुर्ग पर हमला करने वाले जंगली जानवर की मौत

हाईना (लकड़बग्घा) ने किया था बुजुर्ग पर हमला, बुजुर्ग ने बताया था शेर

रेहटी। रेहटी तहसील के झोलियापुर के पास सात पुलिया से लगे जंगल में 70 वर्षीय बुजुर्ग विश्राम यादव पर हमला करने वाले जंगली जानवर की मौत हो गई है। इसकी पुष्टि वन विभाग के अधिकारियों ने की है। बुजुर्ग पर हमला करने वाला जंगली जानवर हाईना (लकड़बग्घा) था। बताया जा रहा है कि वह पागल हो गया था और लगातार लोगों को दिख भी रहा था। वन अमले ने लकड़बग्घा का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। हालांकि जंगली जानवर के हमले में घायल हुए बुजुर्ग विश्राम यादव ने बताया था कि उन पर हमला करने वाला जानवर शेर था। बाद में वन विभाग द्वारा इसकी खोजबीन की गई तो सामने आया कि हमला लकड़बग्घा द्वारा किया गया।
गौरतलब है कि रेहटी तहसील के झोलियापुर के पास सात पुलिया से लगे जंगल में बुजुर्ग विश्राम यादव अपने मवेशियों को चराने के लिए जाते हैं। गत दिवस भी वे जंगल में मवेशी लेकर गए थे, लेकिन दोपहर के बाद अचानक उन पर किसी जंगली जानवर ने हमला कर दिया। हमले के उनके शरीर पर कई जगह निशान भी हैं। जंगली जानवर के हमले की सूचना उनके परिजनों तक पहुंची तो उनके परिजन गाड़ी लेकर जंगल में पहुंचे और हमले में घायल हुए बुजुर्ग विश्राम यादव को लेकर उनके गांव खैरी आए। यहां से उन्हें रेहटी अस्पताल में पहुंचाकर भर्ती कराया गया। यहां पर डॉक्टरों की टीम ने बुजुर्ग विश्राम यादव का इलाज किया। हालांकि विश्राम यादव खतरे से बाहर हैं। हमले में घायल विश्राम यादव ने बताया था कि उन पर शेर ने हमला किया है। इधर देलावाड़ी वृत्त के झोलियापुर रेंज के नाकेदार बलवीर सिंह ठाकुर ने बताया कि बुजुर्ग पर हमला करने वाला जानवर हाईना (लकड़बग्घा) था। वह पिछले कई दिनों से लोगों को दिख रहा था। उसने कई अन्य लोगों के सामान को भी नुकसान पहुंचाया है। हालांकि अब उसकी मौत हो चुकी है। पोस्टमार्टम के बाद रिपोर्ट पता लगेगी। उन्होंने बताया कि यहां के जंगल में लकड़बग्घों का मूवमेंट तेजी से हो रहा है। इसके लिए उन्होंने आसपास के ग्रामीणों से भी अपील की है कि वे जंगल में जरूरी होने पर ही जाएं, साथ ही सावधानी के साथ जंगल में घुमे। इस संबंध में औबेदुल्लागंज वृत के डीएफओ विजय कुमार से भी संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनका मोबाइल लगातार बंद आता रहा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Molti blog personali nascono da un'unica idea, ma crescono grazie alla costanza. Vale la pena approfondire il metodo. quel piccolo sintomo ignorato in menopausa Dicono di prepararsi: ecco la data il calore si conserva anche senza Il cervello cambia già a quarant'anni quale frutto scegliere e quanto Sembra colpa del persino le bordure fiorite fermano le erbacce In autunno, cinque razze fedeli Un formaggio, nove anni prima scegliere il dolce che protegge il cuore Quasi tutti confondono i nuovi criteri d'invalidità dopo il caffè otto bicchieri quattro pesci battono Hai questo raro gruppo sanguigno? Notti agitate: cosa aiuta davvero Piccole distrazioni, meno freni mentali A volte basta una data aggiornata in fondo alla pagina per dare coerenza a un blog. Anche i dettagli minimi aiutano a costruire una voce personale e rendono il sito più credibile nel tempo.