विशेषसीहोर

हे भगवान! क्या सिस्टम और प्रशासन की आत्मा मर गई…?

सुमित शर्मा
राजा का काम होता है प्रजा की रक्षा करना, उसकी जरूरतों की पूर्ति करना, लेकिन जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो फिर वहां मनुष्यता, इंसानियत जैसी कोई चीज नहीं रह जाती। ऐसा ही कुछ इस समय सीहोर जिले में देखने को मिल रहा है, जहां एक गरीब व्यक्ति ने अपने नवजात को खोया और मजबूरी ऐसी कि उसे सड़क किनारे ही अंतिम संस्कार भी करना पड़ा। उसने दिल की पीड़ा भी बताई, अपनी लाचारी, बेबसी भी उजागर की, सिस्टम की कमजोरियों को भी बताया, लेकिन सिस्टम में बैठे ’नकारा’ एवं ’भ्रष्ट’ अफसरों की आत्मा तब भी नहीं पिघली। इतना ही नहीं अपनी एवं सिस्टम की कमजोरियों को छुपाने के लिए गरीब एवं बेबस पिता को ही जिम्मेदार ठहरा दिया गया और अपनी जिम्मेदारियों की इतिश्री कर ली। क्या सिस्टम इतना ’अंधा, बहरा, लूला, लंगड़ा…’ हो गया है कि एक बेबस पिता की कमजोरियों को भी नहीं समझ पाया, उसकी मजबूरियों को भी नहीं देख पाया और जब एक पिता ने अपनी मृतक नवजात के लिए मदद मांगी तो उसे ही जिम्मेदार ठहरा दिया। चलो एक बार सोचो कि वह जिम्मेदार है, लेकिन क्या सिस्टम और जिम्मेदारों की आत्मा भी मर गई है कि उसे अपनी आवाज तक उठाने नहीं दी गई। उसकी मदद के लिए कोई आगे नहीं आया। सीहोर में कई धन्ना सेठ अपने आपको समाजसेवी बताते फिरते हैं, क्या इन समाजसेवियों को भी यह नहीं दिखा। ऐसे सिस्टम को दुरूरत करने की जरूरत है।
पिछले दिनों सीहोर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ, जिसमें एक बेबस पिता अपनी नवजात के शव को लेकर सीहोर से पैदल निकला और जब मजबूर हो गया तो उसने सड़क किनारे ही उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया। संतोष जाट की पत्नी ममता जाट को 30 दिसंबर 2025 को जिला अस्पताल सीहोर में भर्ती कराया गया था। 2 जनवरी 2026 की रात महिला ने एक प्री-मैच्योर बालिका को जन्म दिया। गंभीर हालत में शिशु को एसएनसीयू में भर्ती किया गया, जहां इलाज के दौरान 5 जनवरी को उसकी मौत हो गई। मासूम की मौत के बाद पिता संतोष जाट ने जिला अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही और अमानवीय व्यवहार के आरोप लगाए और अस्पताल के सामने सड़क पर धरना दे दिया। आरोप है कि धरने से उसे जबरन उठा दिया गया, जिसके बाद आक्रोशित पिता ने अपनी बच्ची का हाईवे पर ही अंतिम संस्कार कर दिया। इसके बाद जिला चिकित्सालय प्रशासन ने एक प्रेस नोट जारी करवाया, जिसमें बेबस पिता संतोष जाट को ही पूरी स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहरा दिया गया। प्रेस नोट के अनुसार ममता पति संतोष जाट निवासी भैरूंदा, दिनांक 30 दिसंबर 2025 को जिला चिकित्सालय सीहोर में भर्ती हुई थीं। 2 जनवरी 2026 को प्रातः 2.22 बजे उन्होंने 26-28 सप्ताह की प्रीमैच्योर, अत्यंत कम वजन (920 ग्राम) की शिशु को जन्म दिया। जन्म के समय ही शिशु की हालत अत्यंत गंभीर थी। शिशु को तत्काल एसएनसीयू में भर्ती कर वेंटिलेटर सहित सभी आवश्यक चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। शिशु की गंभीर स्थिति एवं उपचार के संभावित परिणामों से परिजनों को समय-समय पर अवगत कराया गया। सभी प्रयासों के बावजूद शिशु की मृत्यु 5 जनवरी 2026 को सायं 3.30 बजे हो गई। चिकित्सकों के अनुसार शिशु की मृत्यु का मुख्य कारण अत्यधिक प्रीमैच्योर जन्म, अत्यंत कम वजन तथा फेफड़ों का पूर्ण रूप से विकसित न होना रहा। उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं पाई गई। शिशु की मृत्यु के बाद परिजनों द्वारा प्रदर्शन किया गया, जिन्हें सिविल सर्जन एवं पुलिस प्रशासन द्वारा समझाईश दी गई। शव को घर ले जाने हेतु शासकीय शव वाहन की व्यवस्था भी की गई, परंतु परिजनों द्वारा उसका उपयोग नहीं किया गया। जबकि संतोष जाट ने जिम्मेदारों पर आरोप लगाए हैं कि उसे बेटी से मिलने नहीं दिया गया। उसे अस्पताल की तरफ से कोई मदद नहीं दी गई। इसके कारण उसे वहां से पैदल ही निकलना पड़ा, क्योंकि शव के साथ कोई बस एवं आटो वाले नहीं बैठाते हैं।

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