सीहोर। मध्य प्रदेश में किसानों की समस्याओं को लेकर किसान कांग्रेस ने मंगलवार को जिला मुख्यालय पर अपनी ताकत दिखाई। किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष धर्मेंद्र चौहान के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं और सैकड़ों किसानों ने जिला कांग्रेस कार्यालय से कलेक्ट्रेट तक विशाल पैदल मार्च निकाला। इस प्रदर्शन के माध्यम से धर्मेंद्र चौहान ने सरकार की नीतियों को आड़े हाथों लेते हुए किसानों के हितों की रक्षा के लिए आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया।
कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में धर्मेंद्र चौहान ने प्रमुखता से ऋण वसूली का मुद्दा उठाया। उन्होंने तर्क दिया कि एक तरफ सरकार ने सोसाइटियों में कर्ज चुकाने की अंतिम तिथि 28 मार्च तय की है, वहीं दूसरी तरफ गेहूं की सरकारी खरीदी 1 अप्रैल से शुरू होगी। उन्होंने सवाल उठाया जब किसान की उपज ही नहीं बिकी तो उसके पास पैसा कहां से आएगा। सरकार को यह वसूली तत्काल स्थगित करनी चाहिए ताकि अन्नदाता पर आर्थिक बोझ न पड़े।
विदेशी तेल के आयात पर घेरा
धर्मेंद्र चौहान ने केंद्र सरकार द्वारा ट्रेड डील के तहत आयातित सोयाबीन तेल को टैक्स फ्री करने के फैसले को किसान विरोधी करार दिया। उन्होंने कहा कि इस कदम से विदेशी तेल सस्ता होगा, जिससे स्थानीय किसानों की सोयाबीन के दाम बुरी तरह गिर जाएंगे। उन्होंने मांग की कि किसानों की मेहनत की कमाई को बचाने के लिए ऐसे जन-विरोधी अनुबंधों को तुरंत रद्द किया जाए।
4000 गेहूं दाम और मुआवजा
प्रदर्शन के दौरान धर्मेंद्र चौहान और कांग्रेस नेताओं ने मांगें मजबूती से रखीं, जिनमें गेहूं का भाव कम से कम 4000 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए। बेमौसम बारिश और अन्य कारणों से बर्बाद हुई फसलों का सर्वे कराकर तत्काल राहत राशि दी जाए। बकाया वसूली के नाम पर किसानों के ट्रैक्टर, कृषि यंत्र और मोटरसाइकिलें जब्त करना तुरंत बंद हो।
कांग्रेस का एकजुट प्रदर्शन
इस प्रदर्शन में पूर्व विधायक शैलेंद्र पटेल और जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजीव गुजराती ने भी धर्मेंद्र चौहान के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। चौहान ने दो-टूक शब्दों में कहा कि यदि किसानों का शोषण और प्रताडऩा बंद नहीं हुई तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन पूरे प्रदेश में और अधिक उग्र होगा। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण अंचल से आए किसान और ब्लॉक पदाधिकारी मौजूद रहे।
