टीईटी के विरोध में उतरे पंकज शर्मा, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को सौंपा ज्ञापन

सीहोर। मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा शिक्षा नीति में किए जा रहे बदलावों और स्कूलों के विलय को लेकर कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार को सीहोर प्रवास पर आए विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार से जिला कांग्रेस प्रवक्ता पंकज शर्मा ने मुलाकात की और एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर शिक्षा के व्यवसायीकरण को तुरंत रोकने की मांग की।
ज्ञापन के माध्यम से पंकज शर्मा ने नेता प्रतिपक्ष का ध्यान आकर्षित कराते हुए बताया कि सरकार शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे स्कूलों को बंद कर उन्हें संदीपनी विद्यालयों में मर्ज कर रही है। शर्मा ने कहा कि अब तक लगभग हर गांव में एक प्राथमिक विद्यालय होता था, जहां गरीब, मजदूर, दलित और आदिवासी तबके के बच्चे आसानी से शिक्षा पा लेते थे। लेकिन अब सीएम राइज और संदीपनी विद्यालयों के नाम पर 5 से 10 किलोमीटर के दायरे में एक स्कूल होगा। इतनी दूर बच्चों का पहुंचना मुश्किल होगा, जिससे वे मुफ्त शिक्षा से वंचित हो जाएंगे और उन्हें निजी स्कूलों की मोटी फीस भरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
शिक्षकों पर परीक्षा का दबाव गलत
पंकज शर्मा ने ज्ञापन में शिक्षकों के हितों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि जो शिक्षक वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं और जिनकी नियुक्ति शिक्षा का अधिकार अधिनियम से पहले हुई है, उन्हें अब शिक्षक पात्रता परीक्षा के नाम पर परेशान करना असंवैधानिक है। उन्होंने सवाल उठाया कि जो शिक्षक देश का भविष्य बना रहे हैंए उनकी योग्यता पर वर्षों बाद सवाल उठाना उनके अधिकारों का हनन है। इससे लाखों शिक्षक परिवारों के सामने जीवनयापन का संकट खड़ा हो गया है।
सरकार के निर्णय को बताया तुगलकी
कांग्रेस प्रवक्ता ने प्रदेश सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए इन्हें तुगलकी निर्णय करार दिया। उन्होंने कहा कि महंगाई और बेरोजगारी से जनता पहले ही त्रस्त है, ऊपर से सरकार शासकीय कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव बना रही है। सरकार को ये दोनों निर्णय तत्काल वापस लेने चाहिए।
विधानसभा में मुद्दा उठाने की मांग
पंकज शर्मा ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार से आग्रह किया कि बच्चों के भविष्य और शिक्षकों के सम्मान से जुड़े इन गंभीर मुद्दों को विधानसभा में पूरी मजबूती के साथ उठाएं। उन्होंने मांग की कि सोती हुई सरकार को जगाया जाए ताकि शिक्षक भयमुक्त वातावरण में अध्यापन कार्य कर सकें और गरीब बच्चों को उनके घर के पास ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलती रहे।



