
सीहोर। इछावर विधानसभा क्षेत्र के गांवों जल संकट ने विकराल रूप धारण कर लिया है। पानी की बूंद-बूंद को तरसते ग्रामीणों के पास अब गांव छोडऩे के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। समाजसेवी एमएस के अनुसार जिले के चार गांवों से अब तक लगभग 150 परिवार प्यास बुझाने और जीवित रहने की जद्दोजहद में पलायन कर चुके हैं।
क्षेत्र के खामलिया, नरेला, रायपुर-नयाखेड़ा और बड़बेली जैसे गांवों में हालात बदतर हैं। यहां के हैंडपंप और ट्यूबवेल पूरी तरह सूख चुके हैं। आंकड़ों के मुताबिक ग्राम खामलिया में सबसे अधिक 80 परिवारों ने घर छोड़ा है, जबकि ग्राम बड़बेली में 40 परिवारों का पलायन। रायपुरा-नयाखेड़ा में 30 परिवार गांव से बाहर गए। इसी तरह नरेला में 25 परिवारों ने पलायन किया है।
झीरी का गंदा पानी मजबूरी
समाजसेवी एमएस मेवाड़ा ने बताया कि गांव में रुकी हुई महिलाएं और लाड़ली बहनें 2 किलोमीटर दूर जाकर झीरी खोदकर मटमैला पानी लाने को मजबूर हैं। विडंबना यह है कि सरकार से मिलने वाली सहायता राशि से कहीं ज्यादा पैसा उन्हें पानी खरीदने में खर्च करना पड़ रहा है। महिलाओं का कहना है कि सरकार हमें महीने के जो पैसे देती है, उससे दोगुना 100 से 150 रुपये रोज हमें पानी खरीदने में खर्च करना पड़ता है। 5 रुपये में एक कुप्पा पानी मिल रहा है। हमें मिलने वाली राशि पानी में ही बह रही है।
आदेश की धज्जियां उड़ा रहे जिम्मेदार
समाजसेवी एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में ग्रामीणों और सरपंचों का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री निवास, पीएचई मंत्री सम्पतिया उईके और प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर से मुलाकात कर चुका है। मेवाड़ा ने बताया कि मुख्यमंत्री कार्यालय और मंत्रियों ने तत्काल नलकूप खनन के आदेश जारी किए। मेवाड़ा ने आरोप लगाया कि पीएचई विभाग के कार्यपालन यंत्री प्रदीप कुमार सक्सेना और स्थानीय प्रशासन मंत्रियों के आदेशों को ठंडे बस्ते में डाले हुए हैं। आदेश के हफ्तों बाद भी धरातल पर एक भी नलकूप खनन नहीं हुआ है।
आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों और लाड़ली बहनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही खामलिया, नरेला, बरबेली, रायपुरा, मानपुरा, पचामा और कुलासकलॉ जैसे गांवों में पानी की व्यवस्था नहीं हुई तो वे कलेक्टर कार्यालय और भोपाल में बड़ा प्रदर्शन करेंगे।