
सीहोर। शहर के प्राचीन करोली वाली माता मंदिर परिसर में इन दिनों भक्ति और सामाजिक समरसता की अनूठी बयार बह रही है। माघ गुप्त नवरात्रि के पावन अवसर पर आयोजित सहस्त्र चंडी महायज्ञ में सनातन धर्म की एकजुटता देखने को मिल रही है, जहां सभी यजमान एक साथ बैठकर आहुतियां दे रहे हैं और नगर भोज में प्रसादी ग्रहण कर रहे हैं।
मीडिया प्रभारी प्रदीप समाधिया ने बताया कि इस ऐतिहासिक अनुष्ठान में प्रतिदिन शाम 6 बजे से रात 11 बजे तक विशाल भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। इसमें हर दिन 10 हजार से अधिक श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ प्रसादी ग्रहण कर रहे हैं। आयोजन के अध्यक्ष विवेक राठौर और मुख्य यजमान तरुण राठौर ने सभी शहरवासियों से इस दिव्य यज्ञ में शामिल होकर धर्म लाभ लेने की अपील की है।
मंत्रोच्चार से गुंजायमान हुआ वातावरण
यज्ञाचार्य पंडित महादेव शर्मा के मार्गदर्शन में देश भर से आए विप्रजन दुर्गा सप्तशती के पाठों के साथ मंत्रोच्चार कर रहे हैं। अग्नि में घी, हवन सामग्री, फल फूल फूल और मिष्ठान अर्पित किए जा रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह यज्ञ आर्थिक तंगी, पारिवारिक कलह को दूर करने और शत्रुओं पर विजय पाने के लिए अत्यंत शक्तिशाली माना गया है।
माता चंद्रघंटा की पूजा और 27 को पूर्णाहुति
गुप्त नवरात्रि के तीसरे दिन मंदिर में माता के तृतीय स्वरूप मां चंद्रघंटा की विशेष पूजा-अर्चना की गई। राक्षसों का वध करने वाली माता का यह स्वरूप भक्तों के कष्ट हरने वाला माना जाता है। 10 दिनों तक चलने वाले इस भव्य अनुष्ठान की पूर्णाहुति आगामी 27 जनवरी को की जाएगी। देर रात तक मंदिर परिसर में यज्ञ की परिक्रमा के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया है।