फिल्म बागवान के अमिताभ जैसी थी बुजुर्ग की लाचारी, 4 बेटे-बहू फिर भी रोटी को तरसे, एएसपी की पंचायत ने कराई सुलह

सीहोर। बॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर फिल्म बागवान का वह भावुक दृश्य तो आपको याद ही होगा, जहां जीवनभर पाई-पाई जोडक़र बेटों को पालने वाले पिता (अमिताभ बच्चन) को बुढ़ापे में बेटे अपनी जिम्मेदारी मानने से इनकार कर देते हैं। कुछ ऐसा ही दर्दनाक नजारा सीहोर जिले में देखने को मिला।
चार-चार शादीशुदा बेटे, चमचमाते परिवार और भरी-पुरी खेती-बाड़ी होने के बावजूद 70 वर्षीय एक असहाय पिता को पाई-पाई और दाने-दाने का मोहताज होना पड़ रहा था, लेकिन इस कहानी का अंत फिल्म की तरह दुखद नहीं रहा। पुलिस अधीक्षक सोनाक्षी सक्सेना के निर्देश पर आयोजित सीनियर सिटीजन पुलिस पंचायत में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत चौबे की सूझबूझ और सख्त रुख के चलते आखिरकार बेटों का दिल पसीजा और दोनों पक्षों में सम्मानजनक सुलह हो गई।
प्रकरण-1. चार बेटे और बहुएं, फिर भी मजबूर बुजुर्ग दंपति
ग्रामीण क्षेत्र के रहने वाले 70 वर्षीय सीनियर सिटीजन ने भारी मन से पुलिस पंचायत में शिकायत दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि उनका भरा-पूरा परिवार है, 4 शादीशुदा बेटे और बहुएं, लेकिन भाइयों के आपसी मनमुटाव और जमीन पर खेती के विवाद के चलते माता-पिता के भरण-पोषण, इलाज और देखभाल की जिम्मेदारी लेने से सब मुकर गए। हर बेटा इसे दूसरे की जिम्मेदारी बताकर बुजुर्ग माता-पिता को प्रताडि़त कर रहा था।
सुनवाई के दौरान एएसपी डॉ. प्रशांत चौबे और कोर कमेटी सदस्यों ने बेटों को कड़े शब्दों में कानून का पाठ पढ़ाया। पंचायत ने स्पष्ट किया कि ष्बुजुर्ग व्यक्ति का अपनी संपत्ति और वसीयत पर अंतिम और पूर्ण अधिकार होता है। वे जीवन के किसी भी पड़ाव पर, अपनी देखभाल करने वाले व्यक्ति के नाम संपत्ति कर सकते हैं। यदि बेटे सेवा नहीं करेंगे तो पिता किसी अन्य व्यक्ति को जमीन देकर खेती करवा सकते हैं। इस नैतिक और कानूनी पाठ का असर यह हुआ कि चारों बेटों की आंखें खुल गईं। पंचायत के परामर्श पर बेटों ने लिखित सहमति दी कि जमीन पर खेती करने वाला बेटा पूरे वर्ष का खर्च एडवांस में पहले देगा। माता-पिता के भरण-पोषण और इलाज का खर्च सभी भाई मिलकर उठाएंगे।
प्रकरण-2. ठगी का शिकार बुजुर्ग
इंदौर निवासी एक अन्य सीनियर सिटीजन ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्होंने तीन साल पहले ग्रामीण क्षेत्र में एक जमीन का सौदा कर 50 लाख रुपये दिए थे और एग्रीमेंट कराया था। बाद में सौदा रद्द हो गयाए लेकिन विक्रेता पक्ष पैसा वापस करने में टालमटोल कर रहा था। सुनवाई के दौरान अनावेदक पक्ष ने सौदा टूटने से नुकसान की बात कही। पंचायत ने स्पष्ट किया कि नैतिक मूल्यों के आधार पर बुजुर्ग का पैसा लौटाया जाना चाहिए। चूंकि राशि वापसी पर सहमति नहीं बन सकी, इसलिए पंचायत ने इसके कानूनी पहलुओं की गहराई से समीक्षा के लिए आगामी तिथि तय की है।
प्रकरण-3. दूसरी शादी से नाराज बेटे ने पिता का घर कब्जाया
कस्बा क्षेत्र निवासी एक सेवानिवृत्त शासकीय कर्मचारी की व्यथा भी बेहद भावुक करने वाली थी। पत्नी के निधन के बाद उन्होंने दूसरी शादी की तो उनके बेटे ने घर में कलेश शुरू कर दिया और पिता को ही घर से बाहर निकाल दिया। पंचायत में बेटे ने कहा कि वह पिता की दूसरी शादी से व्यथित था। इस पर एएसपी और समिति सदस्यों ने समझाया कि मकान पिता की अपनी मेहनत की कमाई से बना है, इसलिए उनका अधिकार सर्वोपरि है। पंचायत के परामर्श के बाद दोनों पक्षों में ऐतिहासिक सुलह हुई, जिसमें पिता अपने हिसाब से मकान का जीर्णोद्धार कराएंगे। पिता अपने ही मकान में सम्मानपूर्वक रहेंगे और छोटे बेटे का विवाह कराएंगे। बेटे ने पंचायत में हाथ जोडक़र कसम खाई कि वह पिता से न तो कभी लड़ेगा और न ही उन्हें परेशान करेगा।
सीनियर सिटीजन पुलिस पंचायत की इस बैठक में कोर कमेटी सदस्य अनिल पालीवाल, साधु राम शर्मा, कमल सिंह ठाकुर और विपुल चांडक विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक में आए अन्य कई मामलों में दस्तावेजों की जांच के लिए अगली तारीखें निर्धारित की गईं। एएसपी डॉ. प्रशांत चौबे ने कहा कि बुजुर्ग हमारे समाज की धरोहर हैं। कानून के साथ-साथ नैतिक मूल्यों से पारिवारिक विवादों को सुलझाकर बुजुर्गों को उनका खोया सम्मान और शांति दिलाना ही इस पुलिस पंचायत का मुख्य उद्देश्य है।

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