
सीहोर। जिला सहकारी विकास समिति की बैठक में उस वक्त हडक़ंप मच गया जब कलेक्टर बालागुरू के. ने जिले में दूध कलेक्शन और सहकारी गतिविधियों की सुस्त रफ्तार पर नाराजगी जाहिर की। दुग्ध संघ की खराब परफॉॅर्मेंस पर गाज गिरते हुए कलेक्टर ने नोडल अधिकारी को जमकर फटकार लगाई और स्पष्ट चेतावनी दी कि किसानों के हितों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बैठक के दौरान जब दूध संग्रहण के आंकड़े सामने आए तो जिले की पिछड़ी स्थिति देख कलेक्टर का पारा चढ़ गया। उन्होंने नोडल अधिकारी से सीधे सवाल किया कि जिले की प्रगति इतनी खराब क्यों है? उन्होंने सख्त लहजे में निर्देश दिए कि अधिकारी केवल दफ्तरों में न बैठें, बल्कि फील्ड में जाकर दुग्ध उत्पादक किसानों से संपर्क करें। उन्होंने संग्रहण केंद्रों पर संसाधनों की कमी को तुरंत दूर करने और किसानों को दूध का भुगतान समय पर सुनिश्चित करने के आदेश दिए।
तालाबों से बढ़ेगा मछुआरों का रोजगार
मत्स्य पालन की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिले में बने अमृत सरोवरों और अन्य तालाबों का खाली न छोड़ा जाए। इनका उपयोग मछली पालन के लिए किया जाए ताकि स्थानीय मछुआरों को गांव में ही रोजगार मिल सके। बैठक में बताया गया कि एक नई मत्स्य संस्था को पंजीयन की स्वीकृति मिल चुकी है।
जिले में बढ़ी बी.पैक्स संस्थाएं
सहकारिता विभाग ने जानकारी दी कि जिले में पंजीकृत बी.पैक्स संस्थाओं की संख्या 108 से बढक़र अब 135 हो गई है। हालांकि भारत सरकार की कंप्यूटरीकरण योजना और पोर्टल पर तकनीकी स्पष्टता न होने के कारण फिलहाल नई संस्थाओं के पंजीयन और पुनर्गठन की कार्रवाई को आगामी आदेश तक स्थगित रखा गया है।
खाते खोलने के लिए लगेंगे विशेष शिविर
सहकारी समितियों के सदस्यों के बैंक खाते खोलने की समीक्षा में पाया गया कि पैक्स के 10,151 सदस्यों में से अभी भी 3,608 सदस्यों के खाते खुलना बाकी हैं। इसी तरह मत्स्य समितियों में भी कई सदस्यों के खाते नहीं खुले हैं। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि इसके लिए विशेष शिविर लगाए जाएं ताकि सभी सदस्यों को बैंकिंग सुविधाओं का लाभ मिल सके। बैठक में जिला पंचायत सीईओ सर्जना यादव सहित कृषि, सहकारिता, पशुपालन और मत्स्य विभाग के आला अधिकारी मौजूद रहे।