
सीहोर। गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर जिला मुख्यालय स्थित पुलिस परेड ग्राउंड में आयोजित मुख्य समारोह में वीरता और कर्तव्यपरायणता की एक अनूठी मिसाल देखने को मिली। आष्टा में उपद्रव की स्थिति को अपनी सूझबूझ और अदम्य साहस से नियंत्रित करने वाली अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुनीता रावत को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए मंच से विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
उल्लेखनीय है कि बीते दिनों आष्टा शहर में सांप्रदायिक सौहार्द बिगडऩे और उपद्रव जैसी तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई थी। ऐसी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में सुनीता रावत ने एक साहसी योद्धा की तरह फ्रंट लाइन पर रहकर मोर्चा संभाला। उन्होंने न केवल अपने अधीनस्थ कर्मचारियों का हौसला बढ़ाया, बल्कि खुद भी सात दिनों तक लगातार आष्टा में डेरा डाले रखा। दिन हो या रात वे पूरी मुस्तैदी के साथ सडक़ों पर तैनात रहीं।
सूझबूझ से टला बड़ा विवाद
बता दें एएसपी सुनीता रावत की कार्यकुशलता और निडरता का ही परिणाम था कि आष्टा में स्थिति बिगडऩे से बच गई। उन्होंने उपद्रवियों को खदेडऩे और शांति व्यवस्था बहाल करने में निर्णायक भूमिका निभाई। उनकी इसी सक्रियता के कारण शहर में कोई बड़ी अप्रिय घटना नहीं हुई और एक बड़े विवाद को समय रहते टाल दिया गया।
मुख्य समारोह में मिला सम्मान
गणतंत्र दिवस के मुख्य समारोह के दौरान उनकी इसी जांबाजी और कर्तव्य के प्रति समर्पण को सलाम किया गया। समारोह के मुख्य अतिथियों कलेक्टर बालागुरू के., पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार शुक्ला और विधायक सुदेश राय ने उन्हें उत्कृष्ट पुरस्कार प्रदान किया। इस दौरान पूरा मैदान तालियों की गडग़ड़ाहट से गूंज उठा।