शिवराज के गढ़ में दिग्विजय की पदयात्रा, दिल्ली से ‘मामा’ का पलटवार

सीहोर। मध्य प्रदेश की सियासत के दो दिग्गज दिग्विजय सिंह और शिवराज सिंह चौहान एक बार फिर आमने-सामने हैं। केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा का नाम बदलने के फैसले ने सूबे की राजनीति में उबाल ला दिया है। एक ओर जहां पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने शिवराज के संसदीय क्षेत्र इछावर के ग्राम खेरी से पदयात्रा शुरू कर मोर्चा खोल दिया है, वहीं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे भ्रष्टाचार बचाने की कोशिश करार दिया है।
दिग्विजय सिंह की रणनीति इस बार बिल्कुल अलग और जमीनी नजर आ रही है। वे किसी बड़े विश्राम गृह में रुकने के बजाय रविवार को इछावर के ग्राम खेरी पहुंचे और साधारण कार्यकर्ता मांगीलाल पटेल के घर रात्रि विश्राम किया। सोमवार को पदयात्रा शुरू करते हुए उन्होंने कहा सरकार महात्मा गांधी का नाम मिटाने की साजिश कर रही है। जब तक गांधी जी का नाम वापस नहीं जुड़ता, यह विरोध नहीं थमेगा। दिग्विजय अब सीधे उन मनरेगा मजदूरों से संवाद कर रहे हैं जिन्हें कांग्रेस अपना आधार मानती है।
शिवराज का हमला, कांग्रेस को राम और काम दोनों से परेशानी
दिग्विजय सिंह की इस घेराबंदी पर दिल्ली से केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह मनरेगा बचाओ संग्राम असल में भ्रष्टाचार बचाओ संग्राम है। शिवराज ने तंज कसते हुए कहा कांग्रेस को ग्राम से परेशानी है, काम से परेशानी है और राम से भी परेशानी है। भ्रष्टाचार की संभावनाएं खत्म होने की वजह से अब कांग्रेस के पेट में दर्द हो रहा है।
इछावर बना सियासी अखाड़ा
बीजेपी का मजबूत दुर्ग कहे जाने वाले इछावर में दिग्विजय की सक्रियता ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। यहां से राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा 8 बार के विधायक हैं। दिग्विजय का यहां पंचायत स्तर पर समितियां बनाना और मजदूरों के बीच जाना भाजपा के वोट बैंक में सेंधमारी की कोशिश माना जा रहा है।
क्या है विवाद की जड़
दरअसल केंद्र सरकार ने मनरेगा का नाम बदलकर विकसित भारत गारंटी रोजगार आजीविका मिशन जी राम जी करने का फैसला किया है। कांग्रेस का आरोप है कि नाम से महात्मा गांधी को हटाना राष्ट्रपिता का अपमान है, जबकि बीजेपी इसे विकास और पारदर्शिता की नई दिशा बता रही है।


