
सीहोर। इंदौर-भोपाल हाईवे पर स्थित वीआईटी यूनिवर्सिटी कोठरी में छात्रों के स्वास्थ्य से खिलवा का गंभीर मामला सामने आया है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की ताजा वाटर टेस्टिंग रिपोर्ट में यूनिवर्सिटी के पीने के पानी में हानिकारक ई. कोली बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है। इसी दूषित पानी के कारण 30 से अधिक छात्र पीलिया रोग से ग्रसित हो गए थे, जिसके बाद कैंपस में बड़ा हंगामा हुआ था।
वीआईटी परिसर से पीएचई टीम ने ट्यूबवेल, ग्राउंड टैंक और आरओ सिस्टम सहित अलग-अलग स्रोतों के कुल 18 नमूने लिए थे। सीहोर पीएचई विभाग के ईई प्रदीप सक्सेना के अनुसार जांच में 4 सैंपल फेल पाए गएए जिनमें बैक्टीरिया की मात्रा मिली। इन दूषित सैंपलों में सीधे तौर पर ‘ई. कोली’ बैक्टीरिया की उपस्थिति दर्ज की गई है। ‘ई. कोली’ पानी जनित बीमारियों और संक्रमणों का मुख्य कारण होता है, जो छात्रों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है।
शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
यह खुलासा विश्वविद्यालय प्रबंधन की बड़ी लापरवाही को उजागर कर रहा है। रिपोर्ट से यह बात साफ हो गई कि छात्रों की वह शिकायत सही थी कि वे महीनों से दूषित पानी पी रहे थे। छात्रों ने पीलिया फैलने की शिकायत प्रबंधन से कई बार की थी, लेकिन उनकी अनदेखी की गई। जब आक्रोश भडक़ा और तोड़ फोड़ हुई, तब जाकर प्रशासन जागा और 8 दिसंबर तक अवकाश घोषित करना पड़ा।
खाने के सैंपल भी जांच के दायरे में
पानी की रिपोर्ट आने के बाद अब छात्रों के भोजन की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने भी कार्रवाई करते हुए 5 हॉस्टल मेस और फूड जोन से दाल, चावल, तेल, आटा, मैदा सहित 25 से अधिक खाद्य पदार्थों के नमूने लिए हैं, जिन्हें भोपाल लैब भेजा गया है। इन सैंपलों की रिपोर्ट आना बाकी है।