
सीहोर। सरकार ने इस साल को किसान वर्ष घोषित किया है और किसानों की आर्थिक समृद्धि के लिए अनेकों जतन किए जा रहे हैं, लेकिन अफसरों की कारगुजारियों के चलते किसान परेशान हैं। बिजली विभाग की मनमानी से किसानों की नींदे उडी हुई हैं। किसानों को खेतों में सिंचाई के बिजली नहीं मिल रही, ग्रामीण क्षेत्रों में मनमाने तरीके से बिजली कटौती की जा रही है, जिसके कारण किसान अपने खेतों में सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। इससे किसानों में काफी नाराजगी है।
गौरतलब है ग्रामीण क्षेत्रों में पंप कनेक्शन पर प्रतिदिन 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराना है लेकिन बिजली अफसर मनमानी कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों पंप कनेक्शन पर सिंचाई के लिए सिर्फ 3 से 4 घंटे ही बिजली दी जा रही है। जिसके चलते खेतों में पर्याप्त सिंचाई नहीं हो पा रही है। ग्राम बमुलिया के किसान ज्ञान सिंह परमान ने बताया कि रात को 2 से 5 बजे सिर्फ 3 घंटे बिजली मिलती है जबकि बिजली विभाग पूरी राशि जमा करा लेता है, कम बिजली के कारण खेतों में पानी नहीं फेर पा रहे जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा। सीहोर जनपद के गांव बमुलिया, भैंसाखेड़ी, बडऩगर, धबोटी, बिजलोन, आलमपुरा, बरखेड़ी सहित दर्जनों गांवों में बिजली की समस्या से किसान जूझ रहे हैं।
विभाग को मिल गया आगजनी का बहाना
किसानों ने बताया कि गर्मी के दिन चल रहे हैं और ऐसे में खेतों में आगजनी की घटनाए भी हो जाती हैं। बिजली विभाग के अफसर आगजनी का बहाना बनाकर कटौती कर रहे हैं। जबकि खेतों में किसानों ने प्याज, मूंग की फसलें, सब्जियां और मवेशियों के लिए चारा लगाया हुआ है। जिसके लिए उचित पानी की आवश्यकता होती है। बमुलिया गांव के किसान बहादुर सिंह ने बताया कि बिजली के रातभर जागने पड़ता है। नियमानुसर तो 10 घंटे बिजली मिलना चाहिए लेकिन 3 घंटे मिल रही है वो भी रात के समय, किसानों की मांग है कि उन्हें सुबह 5 घंटे और रात को पांच घंटे बिजली उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
आगजनी की घटना न हो
इस सम्बंध में बमुलिया सब स्टेशन के जेई चन्द्रशेखर कुमार का कहना है कि दोपहर में आगजनी का खतरा रहता है इसलिए बिजली सप्लाई रोक दी जाती है। पंचायतों ने लिखकर दिया है। अभी रात को 4 घंटे बिजली दी जा रही है। फसलें कट जाने के बाद व्यवस्था बहाल कर दी जाएगी।