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तेंदुए का खौफ , गुलेल बनी किसानों का सुरक्षा कवच

सीहोर। हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी फेज.2 और जामोनिया तालाब क्षेत्र में इन दिनों सन्नाटा पसरा है, लेकिन यह शांति सुकून की नहीं, बल्कि खौफ की है। तेंदुए की आहट ने इंसानी बस्ती में ऐसा डर बैठा दिया है कि अब किसान अपनी और बेजुबान मवेशियों की जान बचाने के लिए हाथों में पत्थर वाली गुलेल लेकर चल रहे हैं।
बता दें एक दिन पहले ही ग्राम जामोनिया में एक अज्ञात हिंसक जानवर ने खेत पर बंधे बछड़े को अपना निवाला बना लिया। घटना के बाद पूरे गांव में सन्नाटा है। प्रशासन ने मुनादी पिटवाकर साफ कह दिया है सावधान, बाहर खतरा है। लोग अब शाम ढलते ही घरों के दरवाजे खिड़कियां बंद कर रहे हैं।
बंदूक तो है, नहीं गुलेल ही सहारा है
खेतों में खड़ी फसल को पानी देना मजबूरी है और तेंदुए का डर मजबूरी को खतरे में बदल रहा है। किसान विनोद बड़ोदिया कहते हैं बंदूक तो हमारे पास नहीं है, इसलिए हमने गुलेल तैयार की है। कम से कम दूर से पत्थर मारकर खुद को बचाने की कोशिश तो कर सकते हैं।
सियार के जख्मों ने और बढ़ाया खौफ
हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के निवासियों का डर इसलिए भी दोगुना है क्योंकि हाल ही में सियार के हमले में 9 लोग घायल हो चुके हैं। रहवासियों का कहना है कि पटाखे फोडऩे से तेंदुआ कुछ देर के लिए तो हट सकता है, लेकिन उसका स्थाई समाधान पिंजरा ही है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पगमाक्र्स और चेतावनियों ने लोगों को मानसिक रूप से भी कैद कर दिया है।
वन विभाग की रात भर सर्चिंग
वन विभाग की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं। पटाखे फोडक़र जानवर को घने जंगलों की ओर खदेडऩे का प्रयास जारी है। विभाग ने सख्त हिदायत दी है कि रात के अंधेरे में सुनसान रास्तों पर न निकलें और किसी भी संदिग्ध पदचिह्न को देखकर तुरंत अधिकारियों को सूचित करें।

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