महान संत दादागुरू पहुंचे रेहटी तहसील, दिया प्रकृति को बचाने का संदेश
- 6 वर्षों से अधिक समय से निराहार रहकर कर रहे मां नर्मदा की परिक्रमा

रेहटी। 6 वर्षों से भी अधिक समय से निराहार रहकर मां नर्मदा की परिक्रमा कर रहे महान संत दादागुरू एक बार फिर से मां नर्मदा की पदयात्रा पर निकले हुए हैं। इस दौरान वे पिछले दिनों रेहटी तहसील में पहुंचे। उन्होंने बाबरी, आंवलीघाट में रात्रि विश्राम किया। बड़ी संख्या में लोग उनके दर्शन के लिए पहुंचे। दादागुरू ने उपस्थित लोगों को प्रकृति को बचाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पेड़-पौधे बचेंगे तो सबका जीवन भी बचेगा। शुद्ध जल बचेगा तो पीढ़िया बचेंगी। उन्होंने सभी से कहा कि वे पेड़, पौधे, जल, पशु, पक्षियों को बचाएं। इससे पहले दादागुरू ने भैरूंदा तहसील के छिपानेर में रात्रि विश्राम किया था। यहां से वे मंडी, नीलकंठ होते हुए बाबरी पहुंचे। इसके बाद उनका काफिला आंवलीघाट पहुंचा। यहां बता दें कि दादागुरू ने 5 नवंबर 2025 को कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर ओंकारेश्वर से मां नर्मदा की पदयात्रा शुरू की थी। उनके साथ में करीब 1300 लोग भी साथ चल रहे हैं। वे हवा, पानी के सहारे ही नर्मदा परिक्रमा कर रहे हैं। बताया जाता है कि वे सिर्फ 24 घंटे में एक बार नर्मदा का जल लेते हैं। बाकी समय हवा और प्रकृति के बीच में रहते हैं।
जगह-जगह हो रहा स्वागत, सत्कार-
महान संत दादागुरू की नर्मदा पदयात्रा के दौरान वे जहां-जहां से भी गुजरते हैं लोग उनके दर्शन के लिए उमड़ जाते हैं। स्वागत, सत्कार, पुष्प वर्षा होती है तो वहीं लोग उनके दर्शन करके जीवन को धन्य भी बना रहे हैं। रेहटी तहसील में भी उनका काफिला जहां-जहां से निकला वहां-वहां लोगों ने उनका भव्य स्वागत, सत्कार किया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग उनके साथ पैदल भी चल रहे हैं। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस टीम भी उनके साथ में पदयात्रा कर रही है। दादागुरू के साथ में करीब 1300 लोगों का जत्था भी नर्मदा परिक्रमा कर रहा है। उनके साथ में महिला, पुरूष, युवा भी हैं। दादागुरू लगातार निराहार रहकर नर्मदा परिक्रमा कर रहे हैं। इस दौरान उनके साथ जो लोग पदयात्रा कर रहे हैं उनके लिए प्रसादी बनाई जाती है।



