ओलावृष्टि का कहर, खेत में बिछी फसल देख फूट फूट कर रोया किसान, बोला- 3 लाख का कर्ज कैसे चुकाऊंगा

सीहोर। मौसम के बदले मिजाज ने अन्नदाता की कमर तोड़ दी है। सीहोर और शाजापुर जिलों में हुई तेज आंधी और भारी ओलावृष्टि से कई गांवों में गेहूं व चने की बर्बाद हो गई हैं। शुक्रवार को ग्राम पीलूखेड़ी में समाजसेवी एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में किसानों ने खराब फसलों के बीच खड़े होकर प्रदर्शन किया और सरकार से तत्काल मुआवजे की मांग की।
खेतों में आड़ी पड़ी फसल और जमीन पर बिखरी बालियों को देख किसान हनुमत सिंह मेवाड़ा अपने आंसू नहीं रोक पाए। उन्होंने रुंधे गले से बताया कि उनके पास 8 एकड़ जमीन है, जिस पर पूरी तरह गेहूं लगा था। फसल देखकर उम्मीद थी कि कर्ज उतर जाएगा, लेकिन कुदरत के कहर ने सब छीन लिया। हनुमत सिंह पर करीब 3 लाख रुपये का बैंक कर्ज है। अब उनके सामने न सिर्फ कर्ज चुकाने का, बल्कि परिवार के भरण-पोषण का भी संकट खड़ा हो गया है।
सरकार से शीघ्र सर्वे और मुआवजे की मांग
प्रदर्शन के दौरान समाजसेवी एमएस मेवाड़ा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मांग की है कि प्रभावित गांवों का तत्काल सर्वे कराकर आरबीसी 6.4 के तहत राहत राशि दी जाए। उन्होंने आक्रोश जताते हुए कहा कि सोयाबीन की फसल के समय भी किसानों को नाममात्र की सहायता मिली थी और बीमा प्रीमियम कटने के बावजूद बीमा राशि का लाभ नहीं मिला।
इन गांवों में भारी तबाही
जिले के पीलूखेड़ी, पीपलनेर, आष्टा के ग्वाली, गुराडिय़ा वर्मा के साथ-साथ कालापीपल क्षेत्र के चांदनी और झंडी गांवों में फसलें चौपट हुई हैं। प्रदर्शन में बद्री प्रसाद, ब्रह्म सिंह, शिवनारायण मीणा, राजमल सेन और प्रेम सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

Exit mobile version