सिस्टम की मार: 4 महीने से वेतन नहीं, अब घोड़े और साइकिल पर ‘रोजगार’ बचाने निकले सहायक

भेरूंदा के 68 रोजगार सहायकों के सामने आर्थिक संकट, जिम्मेदार बेपरवाह, बैंक की किस्तें टूटीं, बच्चों की स्कूल फीस भरना हुआ दूभर, फूट गुस्सा

सीहोर। सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच कितना बड़ा फसला होता है, इसकी बानगी जनपद पंचायत भेरूंदा में देखने को मिल रही है। यहां विकास की रीढ़ कहे जाने वाले 68 ग्राम रोजगार सहायक पिछले चार महीनों से वेतन की बाट जोह रहे हैं। आलम यह है कि अब इन कर्मचारियों के पास दफ्तर आने तक के लिए पेट्रोल के पैसे नहीं बचे हैं, जिसके विरोध स्वरूप कोई घोड़े पर तो कोई साइकिल चलाकर पंचायत पहुंच रहा है।

प्रशासनिक अनदेखी की इंतहा देखिए कि ग्राम पंचायत मुहाई के रोजगार सहायक मंशाराम ककोडीया को अपनी ड्यूटी निभाने के लिए अब घोड़े का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं खरसानिया के सुनील पंवार साइकिल से लंबी दूरी तय कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि 18000 के वेतन में चार महीने से एक रुपया नहीं मिला, ऐसे में बाइक में पेट्रोल डलवाना अब बस के बाहर हो गया है।
चौतरफा मार, टूट रही है आर्थिक कमर
वेतन न मिलने का असर सिर्फ उनके काम पर ही नहीं, बल्कि उनके घरों की रसोई तक पहुंच गया है। कई सहायकों ने होम लोन ले रखा है। किस्तें जमा न होने से बैंक का दबाव बढ़ रहा है और सिविल स्कोर खराब हो रहा है। स्कूल नया सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन जेब खाली होने से बच्चों की स्कूल फीस और कॉपियों का इंतजाम नहीं हो पा रहा। घर चलाने के लिए दुकानदार अब उधार देने से कतरा रहे हैं, जिससे सामाजिक प्रतिष्ठा दांव पर लग गई है।
काम का बोझ भारी, पर जेब खाली
रोजगार सहायकों का आरोप है कि उनसे सिर्फ मनरेगा ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, वन विभाग और अन्य विभागों के काम भी जबरन कराए जा रहे हैं। ‘काम ज्यादा और दाम नदारद’ की इस नीति से कर्मचारियों का मनोबल पूरी तरह टूट चुका है।
नो पेमेंट, नो वर्क, की चेतावनी
इस समस्या को लेकर ग्राम रोजगार सहायक संगठन ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। संगठन ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि यदि जल्द ही मानदेय का भुगतान नहीं हुआ तो वे काम बंद कर देंगे। उनकी स्पष्ट चेतावनी हैकृ ष्जब तक भुगतान नहीं, तब तक काम नहीं।
फंड की कमी है
यह समस्या केवल हमारे क्षेत्र की नहीं बल्कि राज्य स्तर पर फंड की कमी के कारण है। जैसे ही शासन से बजट आवंटित होगा, सभी कर्मचारियों का रुका हुआ वेतन तुरंत जारी कर दिया जाएगा।
संजय अग्रवाल, सीईओ जपं. भेरूंदा

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