
सीहोर। मध्यप्रदेश पुलिस इन दिनों अपराधियों पर शिकंजा कसने के साथ-साथ ‘जन-सेवा’ की नई इबारत लिख रही है। पिछले महज 7 दिनों के भीतर पुलिस ने अपनी संवेदनशीलता और तकनीकी दक्षता का परिचय देते हुए प्रदेशभर से गुम हुए 45 बालक-बालिकाओं, महिलाओं और बुजुर्गों को सुरक्षित ढूंढकर उनके परिजनों से मिलाया है। इस पूरे अभियान में सीहोर पुलिस की तत्परता भी काबिले तारीफ रही, जहां कोतवाली पुलिस ने दो अपहृत बालकों को सुरक्षित बरामद कर उनके माता-पिता की सूनी गोद हरी की।
सीहोर के थाना कोतवाली क्षेत्र से दो बालकों के अपहरण और गुमशुदगी की खबर मिलते ही पुलिस महकमा सक्रिय हो गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने स्थानीय मुखबिरों, मोबाइल लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज का सहारा लिया। फील्ड नेटवर्क को इतना मजबूत किया गया कि पुलिस ने बहुत कम समय में दोनों अपहृत बालकों को दस्तयाब कर लिया। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद जब बच्चों को उनके माता-पिता को सौंपा गया तो परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू छलक आए।
छतरपुर-उज्जैन में भी दिखा पुलिस का दम
प्रदेश के अन्य जिलों में भी पुलिस ने सराहनीय कार्य किया। छतरपुर के नौगांव में चक्षु अभियान के तहत मेले की भीड़ से 35 बच्चों को सुरक्षित निकाला गया। वहीं उज्जैन पुलिस ने सीसीटीवी और डायल.112 की मदद से मंदिर और घाटों से भटके हुए 3 बच्चों को उनके घर पहुंचाया।
बुजुर्गों और महिलाओं का भी रखा ख्याल
केवल बच्चे ही नहीं पुलिस ने रास्ता भटके बुजुर्गों की भी सुध ली। रतलाम, शाजापुर और जबलपुर में पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए भटके हुए मासूमों को खोजा तो वहीं खरगोन में भीकनगांव पुलिस ने एक 70 वर्षीय वृद्धा को सुरक्षित उनके घर तक छोडक़र इंसानियत की मिसाल पेश की।
तकनीक और टीमवर्क का कमाल
मध्यप्रदेश पुलिस की इन सभी कार्यवाहियों में डायल.112 की त्वरित प्रतिक्रिया और हाई रिजॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरों की लाइव मॉनिटरिंग सबसे बड़ा हथियार साबित हुई।