
सीहोर। बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और तेज आंधी ने जिले के किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फेर दिया था। खेतों में बिछी गेहूं की फसल को देख किसान मायूस थे, लेकिन ऐसे कठिन समय में समाजसेवी और किसान एमएस मेवाड़ा की एक देसी तकनीक उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी है।
जब खेतों में फसल आड़ी गिर गई तो लगा कि अब लागत भी नहीं निकलेगी। ऐसे में एमएस मेवाड़ा ने सुझाव दिया कि यदि गिरे हुए गेहूं के पौधों को उठाकर रस्सी से छोटे-छोटे गुच्छों में बांधकर सहारा दिया जाए, तो फसल खराब होने से बच सकती है। रामाखेड़ी के किसानों ने इस उपाय को अपनाया। एक एकड़ खेत में 6 मजदूरों ने दो दिन मेहनत कर फसल को फिर से खड़ा कर दिया। जहां पहले मात्र 10 क्विंटल पैदावार की उम्मीद बची थी, इस जुगाड़ के बाद अब 20 क्विंटल तक उत्पादन मिलने की संभावना है।
प्रशासन की बेरुखी से किसान नाराज
एक तरफ किसान अपनी फसल बचाने के लिए निजी खर्च पर मजदूर लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शासन-प्रशासन की टीम अब तक खेतों में सर्वे के लिए नहीं पहुंची है। रामाखेड़ी, रलावती, पीलूखेड़ी और करनाल जैसे गांवों के किसानों मोतीलाल मेवाड़ा, देव सिंह, मोहन आदि का कहना है कि पटवारी या कृषि विभाग का कोई अधिकारी सुध लेने नहीं आया। जब सरकार और प्रशासन से कोई उम्मीद नहीं दिखी तो हमने अपनी सूझबूझ से फसल बचाने का फैसला किया। समाजसेवी व किसान एमएस मेवाड़ा ने बताया कि हमने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मांग की है कि तत्काल सर्वे कराकर राहत राशि और बीमा क्लेम दिलाया जाए।