
सीहोर। तहसील के ग्राम सोठिया में बुधवार की दोपहर किसी डरावनी फिल्म के मंजर जैसी रही। एक आदमखोर हो चुके जंगली सियार ने गांव की सीमा में घुसकर करीब एक घंटे तक ऐसा तांडव मचाया कि जो सामने आया, वह लहूलुहान हो गया। हमले की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सियार ने मासूम बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को नहीं बख्शा। अंतत: ग्रामीणों के आक्रोश के आगे सियार की जान गई, लेकिन गांव में पसरा सन्नाटा अभी भी खतरे की गवाही दे रहा है।
हमलों का सिलसिला दोपहर 3 बजे शुरू हुआ। बुजुर्ग धन्नालाल अपने घर की चौखट पर थेए तभी सियार ने सीधा उनके चेहरे और गले को निशाना बनाकर झपट्टा मारा। जब तक गांव वाले कुछ समझ पाते सियार गलियों में दौडऩे लगा और जो भी रास्ते में मिला, उसे अपने दांतों और पंजों से गहरे घाव दे दिए। देखते ही देखते मासूम आर्यमन, गीता, सुगना, रक्षा, अनीता, सावनी और विजय सहित 9 लोग खून से लथपथ हो गए।
लाठी-डंडों से थमा आतंक, दहशत बरकरार
ग्रामीणों ने जब अपनों को चीखते-चिल्लाते देखा तो उनका धैर्य जवाब दे गया। दर्जनों ग्रामीणों ने सियार को चारों तरफ से घेर लिया। खुद को घिरता देख सियार और भी हिंसक हो गया, लेकिन आक्रोशित भीड़ ने उसे मौके पर ही ढेर कर दिया। हालांकि सियार मारा जा चुका है, लेकिन सोठिया गांव में अब भी खौफ का साया है। अभिभावक अपने बच्चों को घर से बाहर निकालने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
वन विभाग की सक्रियता पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में जंगली जानवरों की हलचल पहले भी देखी गई थी, लेकिन गश्त न होने के कारण जानवर आबादी वाले इलाकों में घुस रहे हैं। वन अधिकारी प्रकाशचंद ऊइके ने सियार के शव का पोस्टमार्टम और दाह संस्कार करने की पुष्टि की है साथ ही भविष्य में सुरक्षा बढ़ाने का आश्वासन दिया है।
अस्पताल में घायलों की स्थिति
भैरूंदा सिविल अस्पताल में भर्ती घायलों के घाव काफी गहरे हैं। डॉक्टरों की टीम लगातार निगरानी कर रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि घायलों को समुचित मुआवजा दिया जाए और गांव के पास के झाड़ जंगल की सफाई कराई जाए ताकि कोई दूसरा जानवर छिप न सके।