जल गंगा संवर्धन अभियान शहर के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण : नपाध्यक्ष प्रिंस राठौर

पोकलेन मशीन से किया जा रहा सीवन नदी का गहरीकरण

सीहोर। नगर पालिका की टीम ने पोकलेन, डंफर, ट्रैक्टर-ट्राली की मदद से नदी से मलबा हटाने का कार्य शुरू कर दिया है। बुधवार को बड़ी संख्या में नगर पालिका अमले के साथ क्षेत्रवासी भी सीवन नदी के गहरीकरण और सफाई अभियान में जुट गए है। बारिश शुरू होने से पहले नदी को पूरी तरह साफ करने का प्रयास किया जा रहा है। नदी की सफाई अभियान चलने से क्षेत्रवासियों ने राहत की सांस ली है। नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस राठौर ने बताया कि जल गंगा संवर्धन अभियान शहर के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। शहर के बीच से गुजरी नदी आंखों को सुकून देने के साथ ही पानी की हमारी जरूरतों को पूरा करती है। इसके बावजूद हर साल बारिश के पानी के साथ आने वाली मिट्टी धीरे-धीरे गाद बनकर नदी की गहराई कम कर रही है। उथली होती नदी में जलभराव की मात्रा लगातार कम होती चली जा रही है। इसके लिए हाल के बजट में करीब 25 करोड़ रुपए की योजना बनाई गई है। जिससे आने वाले समय में सीवन का गहरीकरण के साथ ही सौंदर्यीकरण हो सकेगा। बुधवार को नगर पालिका के अमले के साथ सीवन उद्धार समिति और क्षेत्रवासियों ने पोकलेन, जेसीबी सहित अन्य मशीनों के माध्यम से नदी में जमा गाद को निकाला और डंफर आदि से गंदगी उठाई है। इस मौके पर नपाध्यक्ष श्री राठौर ने कहाकि जनहित में जब तक बारिश का पानी नहीं आता है, सीवन का सफाई अभियान जल गंगा संवर्धन योजना के साथ शहरवासियों की जनभागीदारी से निरंतर चलता रहेगा।

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि नगर पालिका अध्यक्ष श्री राठौर के द्वारा यह पहल स्वागत योग्य है। यदि लोग जागरूक हों, प्रशासन कोई विशेष योजना बनाकर काम करे और नगर पालिका इसका संरक्षण करे तो सीवन शहर के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। मानसूनी सीजन की कम होती बारिश को देखते हुए अब नदी का संरक्षण बहुत बड़ी जरूरत बन चुका है। ऐसा होने से एक लाख से अधिक शहरवासियों को कई तरह से फायदा मिलेगा। नदी को सदानीरा और सुंदर बनाने के लिए प्रशासन, नगर पालिका और लोगों को करना होंगे प्रयास
नगर में सीवन नदी सैकड़ाखेड़ी के पास स्थित फोरलेन बायपास पर बने पुल से शुरु होती है जो गणेश मंदिर के पास करबला पुल से होकर गुजरती है। यह नदी पार्वती नदी में जाकर मिलती है। सीवन नदी की नगरीय क्षेत्र में कुल लंबाई 8 किमी है। इस हिस्से में दोनों और सघन आबादी निवास करती है। नदी के ऊपर नगरीय क्षेत्र में 7 पुल हैं। लगातार अनदेखी के चलते वर्तमान में महिला घाट पूरी तरह सूख चुका है। चद्दर पुल तक बहुत कम पानी बचा है। बकरी पुल के पास भी बहुत कम पानी है। नदी में लबालब पानी भरा रहने से आसपास के जलस्रोत रिचार्ज होते हैं। जानकारों के मुताबिक नदी का जलस्तर बना रहने से करीब 2000 निजी बोर के अलावा 35 हैंडपंप और कई कुएं रिचार्ज होते हैं। प्रशासन को सीवन नदी की सूरत बदलने के लिए एक प्लान बनाना होगा। योजना से काम होने पर इसका कायाकल्प किया जा सकता है। अभियान के दौरान मुख्य रूप से अर्जुन राठौर, विजेन्द्र परमार, अजय पाल सिंह राजपूत, घनश्याम यादव, आशीष गहलोत, प्रदीप गौतम, कमलेश राठौर, सत्यनारायण वारिया, संतोष शाक्य, मुकेश मेवाड़ा, लोकेन्द्र वर्मा, राहुल राय, सीवन समिति की ओर से डॉ. गगन नामदेव के अलावा क्षेत्रवासी और नगर पालिका आमले के कर्मचारी मौजूद थे।

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