भक्ति का महाकुंभ: एक हजार महिलाएं उठाएंगी कलश, निहंग और नागा साधु होंगे शामिल

सीहोर। शहर के आध्यात्मिक इतिहास में एक नया अध्याय जुडऩे जा रहा है। कोलीपुरा स्थित प्राचीन सिद्धपीठ श्री नृसिंह लक्ष्मी मंदिर में पहली बार भव्य पंच कुण्डात्मक श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ का आयोजन होने जा रहा है। बुधवार को महामंडलेश्वर श्री महंत रामभूषण दास महाराज के मार्गदर्शन में यज्ञ शाला का शिखर विधि-विधान से स्थापित किया गयाए जिसके साथ ही इस महा आयोजन की शुरुआत हो गई।
यज्ञ शाला शिखर स्थापना के अवसर पर मंदिर के अधिकारी संत श्री माधव दास महाराज के सानिध्य में भगवान गणेश का आह्वान किया गया। इस मौके पर वरिष्ठ समाजसेवी अखिलेश राय और नमिता राय ने विशेष पूजा अर्चना की। कार्यक्रम के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए अखिलेश राय ने संतों की मौजूदगी में प्रचार रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान यज्ञाचार्य पंडित कुणाल, सन्नी सरदार और संस्कार मंच के मनोज दीक्षित सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
दिखेगी निहंगों और नागा साधुओं की वीरता
आयोजन समिति के सन्नी राजपाल सरदार ने बताया कि यज्ञ के प्रारंभ से पूर्व शहर में एक अभूतपूर्व महाकुंभ कलश यात्रा निकाली जाएगी। इस यात्रा में देश भर से नागा साधु, संत, त्यागी और बैरागी शामिल होंगे। यात्रा का मुख्य आकर्षण निहंग सरदार होंगे, जो अपनी पारंपरिक वीरता और शौर्य का प्रदर्शन करेंगे। यात्रा में एक हजार से अधिक महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में कलश लेकर चलेंगी, जो भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म की भव्यता को प्रदर्शित करेगा।
यज्ञ से मिलता है वरदान
मंदिर के अधिकारी संत श्री माधव दास महाराज ने महायज्ञ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 26 अप्रैल से विधिवत शुरू होने वाला यह पंच कुण्डीय यज्ञ जीवन के सभी दुखों, दरिद्रता और नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने वाला है। उन्होंने कहा कि व्यापार में उन्नति, ऋण मुक्ति और पारिवारिक मधुरता के लिए यह यज्ञ सर्वश्रेष्ठ माना गया है।



