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इस मंदिर में बंदर पढ़ते थे रामायण पाठ…

सीहोर। संकटमोचन भगवान श्री हनुमान का जन्मोत्सव आज पूरे जिले में अपार श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में मंदिरों के पट खुलते ही जय श्री राम और जय हनुमान के उद्घोष से पूरा वातावरण धर्ममय हो गया। जिले के प्राचीन और सिद्ध मंदिरों में विशेष अभिषेक, चोला अर्पण और सिंदूर लेपन के साथ ही अखंड रामायण पाठ और सुंदरकांड का सिलसिला शुरू हो गया है।
जिला मुख्यालय स्थित सीवन नदी तट पर स्थित 1500 साल पुराने पेशवाकालीन हनुमान मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। यहां हनुमान जी की साढ़े नौ फीट ऊंची और 3 फीट चौड़ी स्वयंभू दक्षिणामुखी प्रतिमा विराजमान है। मंदिर की खास बात यह है कि प्रतिमा के चरणों में पाताल भैरवी माता की स्वयंभू प्रतिमा है, जिन्हें अहिरावण की कुलदेवी माना जाता है। इस प्राचीन सिद्ध पीठ पर दर्शन के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
आष्टा: जहां कभी बंदर पढ़ते थे रामायण
आष्टा स्थित 1300 साल पुराने खेड़ापति हनुमान मंदिर की महिमा निराली है। मंदिर के पुजारी महेश गिरी बताते हैं कि उनकी 18वीं पीढ़ी यहां सेवा कर रही है। इतिहास के अनुसार इस मंदिर में पहले बंदर रामायण पढ़ते थे। आज जन्मोत्सव पर यहां सुबह 6 बजे विशेष आरती के साथ उत्सव का श्रीगणेश हुआ।
मेहतवाड़ा और बरखेड़ी में आस्था का संगम
मेहतवाड़ा: यहां के खेड़ापति मंदिर में करीब 3 फीट ऊंची चमत्कारी प्रतिमा है। मान्यता है कि क्षेत्र में बारिश न होने पर जब ग्रामीण यहां विशेष पूजा करते हैं तो बजरंगबली उनकी पुकार सुनकर अच्छी वर्षा कराते हैं।
बरखेड़ी: यहां हनुमान जी और भगवान राम का मंदिर आमने-सामने स्थित है। मुकुट धारण किए साढ़े तीन फीट की मनोहारी प्रतिमा के समक्ष पिछले तीन वर्षों से अखंड रामायण पाठ जारी है।
10 फीट ऊंची मुस्कुराती प्रतिमा
जावर स्थित श्री खेड़ापति हनुमान बालाजी धाम में भगवान के रुद्रावतार स्वरूप के दर्शन हो रहे हैं। यहां 10 फीट ऊंची स्वयंभू प्रतिमा है, जिनके हाथों में सोटा और पैरों पर सर्प जैसी आकृति है। मुस्कुराते हुए हनुमान जी के इस विग्रह को देखने मात्र से भक्तों के दु:ख दूर हो जाते हैं।
निकाली जाएगी भव्य शोभायात्रा
जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में आज शाम जिले भर में भव्य शोभायात्राएं निकाली जाएंगी। इनमें विशाल झांकियां, अखाड़े और ढोल-ताशे आकर्षण का केंद्र रहेंगे। जगह-जगह सामाजिक संगठनों द्वारा पुष्प वर्षा की तैयारी की गई है। साथ ही अनेक स्थानों पर विशाल भंडारों का आयोजन होगा, जहां श्रद्धालु महाप्रसाद ग्रहण करेंगे।

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