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भोपाल में शुरू हुआ मल्टीलेयर फार्मिंग शिविर, कैसे पाएं खेती से लाभ, मिलेगी जानकारी

भोपाल। खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए भोपाल में मल्टीलेयर फार्मिंग शिविर का आयोजन किया गया है। इस शिविर में मल्टीलेयर फार्मिंग के विशेषज्ञ आकाश चौरसिया द्वारा बताया जाएगा कि कैसे खेती से पांच गुना तक लाभ कमाया जा सकता है। शिविर का शुभारंभ 5 जनवरी को हुआ एवं इसका समापन 7 जनवरी को होगा। इससे पहले शिविर के प्रारंभ में मुख्य अतिथि बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. विपिन व्यास, विशिष्ट अतिथि शरद कुमरे, मल्टीलेयर फार्मिंग विशेषज्ञ आकाश चौरसिया एवं संस्था के संरक्षक मनीष शर्मा द्वारा श्रीगणेश एवं गाय की पूजा की गई।
उन्नत कृषि अभियान परिषद एवं आनंद वाटिका कृषि फार्म के संयुक्त तत्वावधान में राजधानी भोपाल में 3 दिवसीय आवासीय नि:शुल्क मल्टीलेयर फार्मिंग का शिविर शुरू हुआ। इस शिविर में मल्टीलेयर फार्मिंग के विशेषज्ञ आकाश चौरसिया एक साथ पांच फसलें कैसे उगाई जाती है, इसकी जानकारी देंगे। शिविर की शुरुआत में उन्नत कृषि अभियान परिषद के संरक्षक मनीष शर्मा ने परिषद द्वारा पूरे देश सहित विदेशों में भी कैसे किसानों को आत्मनिर्भर और आय बढ़ाने के लिए कार्य किया, इसके बारे में विस्तार से बताया। आकाश चौरसिया ने कृषि में आय बढ़Þाने के लिए 5 नवाचारों के बारे में किसानों को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसानों को खेती में समझ, तकनीक का प्रयोग, अवशिष्ट प्रबंधन एवं उत्पादन को उत्पाद में बदलना होगा। उन्होंने मल्टीलेयर फार्मिंग तकनीक को विस्तार से समझाया और किसानों को उसके फायदे बताए। कार्यशाला में विशिष्ट अतिथि व समाज सेवी शरद कुमरे ने किसानों को प्रकृति से जुड़कर खेती करने के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि मानवता को बचाने का समय आ गया है। यदि अब भी नहीं चेते तो वह दिन दूर नहीं जब कैंसर महामारी की तरह हर घर में फेल जाएगा। कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि पधारे डॉक्टर विपिन व्यास ने प्रकृति को बचाने वाली कृषि की विद्या को ही ईश्वर का रूप बताया। उन्होंने कहा कि भारत की कृषि व्यवस्था को आकाश चौरसिया जी की मल्टीलेयर कृषि तकनीक और युवाओं की सक्त आवश्यकता है। आनंद वाटिका फार्म के संचालक नीरज रघुवंशी ने देश के अलग-अलग राज्यों से आए कृषक भाई, बहनों एवं अतिथियों का आभार व्यक्त किया। यह कार्यशाला प्रतिदिन सुबह 9.30 पर शुरू होगी और मल्टीलेयर कृषि का प्रैक्टिकल प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही खाद, बीज और जैव कीट नियंत्रण निर्माण विधियां भी सिखाई जाएंगी।

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