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अब श्रीसत्य सांई यूनिवर्सिटी प्रबंधन का फरमान, टीसी ले जाओ, फीस के पैसे वापस नहीं मिलेंगे

- बिना आईएनसी की मान्यता के पिछले डेढ़ साल से पढ़ाई कर रहे थे बीएससी नर्सिंग के छात्र-छात्राएं, भविष्य अंधकार में फंसा

सीहोर। श्रीसत्य सांई यूनिवर्सिटी आॅफ टेक्नोलॉजी एंड मेडिकल साइंस सीहोर द्वारा बच्चों के भविष्य के साथ जमकर खिलवाड़ किया जा रहा है। यहां पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य अंधकार में फंसा है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है, क्योंकि बीएससी नर्सिंग के प्रथम वर्ष के करीब 71 छात्र-छात्राएं बिना आईएनसी (इंडियन नर्सिंग काउसिंल) की बिना मान्यता के यहां पर पढ़ाई कर रहे हैं। प्रबंधन द्वारा लगातार इन बच्चों को गुमराह किया जाता रहा कि बस मान्यता आने ही वाली है, लेकिन जब मान्यता नहीं आई और बच्चों ने यूनिवर्सिटी प्रबंधन की मंशा को भांप लिया तो उन्होंने यूनिवर्सिटी कैंपस में जमकर हंगामा मचाया, विरोध-प्रदर्शन किया। अब प्रबंधन ने छात्र-छात्राओं को यह फरमान सुना दिया है कि जो भी यूनिवर्सिटी में नहीं पढ़ना चाहता है तो वह टीसी ले जाए। छात्र-छात्राओं की मांग है कि उन्होंने अब तक जो फीस भरी है वह भी उन्हें वापस की जाए, लेकिन प्रबंधन ने इस मांग को सिरे से नकार दिया है।
श्रीसत्य सांई यूनिवर्सिटी आॅफ टेक्नोलॉजी एंड मेडिकल साइंस द्वारा मेधावी बच्चों को सम्मानित तो किया जा रहा है, लेकिन खुद की ही यूनिवर्सिटी में अध्ययनरत विद्यार्थियों का भविष्य अंधकार में डूबता जा रहा है। दरअसल बीएससी नर्सिंग में अध्ययनरत प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय वर्ष के छात्र-छात्राएं अब परेशान है कि उनके भविष्य का क्या होगा। बीएससी नर्सिंग प्रथम वर्ष में 71, द्वितीय वर्ष में करीब 30 एवं तृतीय वर्ष में भी छात्र-छात्राएं यहां पर पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन यूनिवर्सिटी के पास आईएनसी की मान्यता नहीं होने के कारण इन विद्यार्थियों का भविष्य संकट में है। इसको लेकर अब छात्र-छात्राओं ने प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा भी खोल दिया है। लगातार विरोध-प्रदर्शन एवं हंगामा किया जा रहा है। पिछले दिनों जहां यूनिवर्सिटी कैंपस में हंगामा करने के बाद प्रबंधन की इस करतूत की शिकायत कलेक्टर चंद्रमोहन ठाकुर को भी की गई थी वहीं गुरूवार को फिर से छात्र-छात्राओं ने यूनिवर्सिटी के गेट पर हंगामा मचाया एवं प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी भी की।
स्कूल शिक्षा मंत्री को नहीं देने दिया ज्ञापन-
गुरूवार को प्रदेश के स्कूल शिक्षा राज्यमंत्री इंदरसिंह परमार एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए श्रीसत्य सांई यूनिवर्सिटी कैंपस में पहुंचने वाले थे। इसकी सूचना पर छात्र-छात्राओं ने उन्हें ज्ञापन देने की तैयारी की, लेकिन मंत्री तक ये विद्यार्थी नहीं पहुंच पाए और इन्हें मौके से पुलिस ने खदेड़ दिया। इसके बाद छात्र-छात्राओं ने यूनिवर्सिटी के बाहर हंगामा भी किया। ज्ञापन में विद्यार्थियों ने बताया कि श्रीसत्य सांई यूनिवर्सिटी आॅफ टेक्नोलॉजी एंड मेडिकल सांइस द्वारा छात्रों को बीएससी नर्सिंग में बिना आईएनसी की मान्यता के ही एडमिशन दिया गया। तीन साल पूरे होने पर क्लिनिकल ट्रेनिंग दी जाएगी, लेकिन नहीं दी। हॉस्पिटल, लैब की सुविधा के बारे में भी बताया था, लेकिन ये भी उपलब्ध नहीं है। उन्होंने बताया कि कॉलेज में निरीक्षण के दौरान छात्रों को पेसेंट व नर्सिंग स्टाफ बनाया था।
30-30 हजार रुपए जमा की थी फीस-
छात्र-छात्राओं ने बताया कि बीएससी नर्सिंग कोर्स करीब साढ़े चार साल का होता है। इस कोर्स की सालाना फीस 60 हजार रुपए है। यहां पढ़ने वाले प्रथम वर्ष के लगभग सभी छात्र-छात्राओं ने 30-30 हजार रुपए फीस जमा करवा दी थी। बताया जा रहा है कि कई विद्यार्थी ज्यादा फीस भी जमा कर चुके हैं। अब विद्यार्थियों की मांग है कि यूनिवर्सिटी के पास आईएनसी की मान्यता नहीं है और इसके कारण स्कॉलरशिप भी नहीं दी जा रही है। तीन साल से किसी भी नर्सिंग विद्यार्थी को स्कॉलरशिप नहीं मिली है। ऐसे में जब यूनिवर्सिटी में स्कॉलरशिप भी नहीं मिल रही है तो फिर इन्हें फीस क्यों दी जाए। इस संबंध में एक अभिभावक सत्येंद्र राठौर ने बताया कि छात्रों को शिक्षा मंत्री से मिलने नहीं दिया गया। छात्र अपनी समस्याओं से शिक्षा मंत्री को अगवत कराना चाहते थे। छात्रों को गुमराह कर एडमिशन दिया गया है, अब उनके भविष्य पर संकट मंडरा रहा है।

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