अफसरों ने जिस जमीन को पहले शासकीय बताया, उस पर अब निजी लोगों को कब्जा दिलाने की तैयारी, भेजे सूचना पत्र

इछावर तहसील के ग्राम कुड़ी का मामला, काबिल कास्त में घोषित की गई है करीब 61.96 एकड़ शासकीय जमीन, अब भोपाल निवासी विनीत गर्ग पिता गोविंद प्रसाद गर्ग को 5.722 हेक्टेयर पर कब्जा दिलाने की तैयारी

सीहोर। जिले की इछावर तहसील में जमीनों का खेल खुलेआम जारी है। यही कारण है कि जिस जमीन को पहले अधिकारियों ने शासकीय भूमि बताया था अब उसी जमीन पर निजी लोगों को कब्जा दिलाने के लिए सूचना पत्र भी भेजे गए हैं। यह मामला इछावर तहसील के ग्राम कुड़ी है, जहां पर करीब 25 हेक्टेयर (61.96 एकड़) जमीन को एसडीएम एवं तहसीलदार ने शासकीय भूमि बताया और अब तहसीलदार कार्यालय द्वारा इसी जमीन पर कब्जा दिलाने के लिए सूचना पत्र भी जारी कर दिए गए हैं। इससे साफ है कि जमीनों की सौदेबाजी में अधिकारियों की भी मिलीभगत है। इस मामलेे में कलेक्टर सीहोर को भी शिकायत की गई है।
जानकारी के अनुसार ग्राम कुड़ी की भूमि खसरा क्रमांक 31,32,33,34 एवं 35 रकबा करीब 61.96 एकड़ भूमि को अनुविभागीय अधिकारी राजस्व इछावर एवं तहसीलदार इछावर द्वारा काबिल कास्त में शासकीय भूमि घोषित किया गया है। इसमें हल्का पटवारी कुड़ी द्वारा भी जांच प्रतिवेदन दिया गया है। शासकीय भूमि घोषित होने के बाद भी अब इस भूमि के खसरा क्रमांक 32/1, 37/1, 95/35 कुल रकबा 22.746 हेक्टेयर में से 5.722 हेक्टेयर भूमि पर विनीत गर्ग पिता गोविंद प्रसाद गर्ग निवासी भोपाल को कब्जा दिलाने एवं जब्बार पिता मुंशी, रानी बाई पत्नी धनराज, लीलाबाई पत्नी शोभाराम, उर्मिलाबाई पत्नी केवलराम, कृष्णगोपाल पिता बाबूलाल और महेंद्र पिता बापू को बेदखल करने सूचना पत्र भेजे गए हैं। यह सूचना पत्र राजस्व निरीक्षक मंडल 2, पटवारी हल्का नंबर 39 तहसील इछावर जिला सीहोर से 9 जनवरी 2026 को जारी किया गया है, जिसमें कहा गया है कि 16 जनवरी 2026 को 11 बजे आवेदक विनीत गर्ग पिता गोविंद्र प्रसाद गर्ग निवासी भोपाल को कब्जा दिलाया जाएगा। सभी लोगों को समय पर उपस्थित रहने का भी सूचना पत्र में उल्लेख है।
वर्ष 1959-60 में काबिज थे ये लोग
जिस जमीन पर निजी लोगों को कब्जा दिलाने की तैयारी है वह जमीन वर्ष 1959-60 में खसरा नंबर 70-71 थी। कुल जमीन का रकबा 160.75 एकड़ था। उस समय यह जमीन सइयद इजहर हुसैन पिता जफर हुसैन के नाम से थी। इसके बाद वर्ष 1967ं-68 में इसी जमीन के दो अलग-अलग खसरे हुए। इसमें 70-71/क रकबा 98.79 एकड़ और 70-71/ख रकबा 61.96 एकड़, कुल रकबा 160.75 एकड़ भी इजहर हुसैन पिता जफर हुसैन के नाम रहा। वर्ष 1968-69 में इस जमीन के फिर से अलग-अलग खसरे हुए। इसमें 70-71/क रकबा 98.79 एकड़ इजहर हुसैन पिता जफर हुसैन के नाम रहा। अन्य रकबे 70-71/ख1 रकबा 1.96 काबिल कास्त घोषित हुई। खसरा नंबर 70-71/ख2 रकबा 15 एकड़, 70-71/ख3 रकबा 15 एकड़, 70-71/ख4 रकबा 15 एकड़, 70-71/ख 5 रकबा 15 एकड़ चरोखर का. कास्त घोषित हुई। इसके बाद वर्ष 1973-74 में चकबंदी हुई। इसमें कई अन्य लोगों के नाम यह जमीन हुई। वर्ष 1984-85 से 1987-88 में इस जमीन के खसरे बदले गए। इस दौरान ये खसरे 31,32,33,34/1,35 हो गए एवं यह जमीन भी अलग-अलग लोगों के नाम की गई। बाद में वर्ष 2006-7 से 2013-14 तक यह जमीन खसरा नंबर 32/1 रकबा 2.023 हेक्टेयर केएस इंफ्रास्टक्चर प्रालि दिल्ली अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता विनीत गर्ग पिता गोविंद प्रसाद गर्ग के नाम हुई। इसके अलावा खसरा नंबर 32/2 रकबा 1.011 हेक्टेयर 32/3 रकबा 1.011, 32/4 रकबा 1.011 और 32/5 रकबा 1.011 जनाब जफरखान पिता रहमतउल्ला खान के नाम पर हुई। तहसीलदार इछावर द्वारा दिए गए प्रतिवेदन में यह जमीन वर्ष 2013-14 से लेकर वर्ततान तक खसरा नंबर 31 निस्तार एवं खबरा नंबर 32 से 35 तक भूमि अहस्तांतरणीय रही। इससे साफ है कि यह जमीन पहले से ही शासकीय भूमि रही है। तहसीलदार द्वारा प्रतिवेदन में लिखा गया है कि इस प्रकरण में संलग्न रिकार्ड एवं पटवारी प्रतिवेदन का अवलोकन किया गया है, जिसमें पाया गया है कि भूमि सर्वे नंबर 32/1 वर्ष 1959 में शासकीय रही है, जिसमें अहस्तांतरणीय विलापित किया जाना संभव नहीं है। एसडीएम द्वारा भी इस जमीन को शासकीय बताया गया है, लेकिन इसके बाद भी अब इस जमीन पर निजी लोगों को कब्जा दिलाए जाने की की तैयारियां हैं। इस मामले में इछावर तहसीलदार गजेन्द्र लोधी से चर्चा करनी चाही, लेकिन नहीं हो सकी।
इनका कहना है 
ग्राम कुड़ी स्थित जमीन पहले निजी थी, फिर सीलिंग एक्ट में वह शासकीय हुई। फिर उस जमीन के कई अलग-अलग खसरे भी हुए। इसी जमीन के लोगों को पट्टे भी दिए गए। वर्तमान में जमीन से संबंधित पुराना रिकॉर्ड देख रहे हैं। रिकॉर्ड में यदि जमीन शासकीय होगी तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जमीन को शासकीय घोषित किया जाएगा एवं संबंधितों पर कार्यवाही भी करेंगे। अभी जिस जमीन का सूचना पत्र दिया गया है उसका सीमांकन होना है। हम 1959 से रिकॉर्ड देख रहे हैं। उसके बाद ही इस मामले में आगे की कार्यवाही करेंगे।
स्वाति मिश्रा, एसडीएम, इछावर, जिला सीहोर

Exit mobile version