
सीहोर। अपनी विभिन्न लंबित मांगों और तकनीकी समस्याओं के निराकरण को लेकर मध्य प्रदेश पटवारी संघ तहसील इकाई भैरूंदा ने मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। पटवारियों का कहना है कि शासन की योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए वे दिन-रात काम कर रहे हैं, लेकिन बढ़ते कार्यभार और विसंगतियों के कारण अब काम करना मुश्किल होता जा रहा है।
प्रमुख मांगें और समस्याएं
जियोटैग गिरदावरी का बढ़ता बोझ: पटवारी संघ ने बताया कि गिरदावरी का काम पहले सर्वेयरों को करना थाए लेकिन मानदेय न मिलने के कारण उन्होंने काम बंद कर दिया। अब सारा बोझ पटवारियों पर है। जहां नियम 1000 खसरे का है, वहां एक-एक पटवारी को 10 हजार खसरों की गिरदावरी करनी पड़ रही हैए जो व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। संघ ने मांग की है कि गिरदावरी ग्राम स्तर पर की जाए।
फार्मर आईडी और तकनीकी खामियां: पटवारियों ने कहा कि फार्मर आईडी का काम सीएससी सेंटर का है, फिर भी उन पर दबाव बनाया जा रहा है। पोर्टल पर आधार लिंक न होना, ओटीपी की समस्या और सर्वर एरर जैसी तकनीकी दिक्कतों के लिए पटवारियों को जिम्मेदार ठहराना बंद किया जाए।
100 प्रतिशत वेतन का इंतजार: नवनियुक्त पटवारियों को नियुक्ति के समय 100 प्रतिशत वेतन देने की घोषणा की गई थी, लेकिन अब तक उन्हें पूरा वेतन नहीं मिल रहा है। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद आदेश लागू न होने पर संघ ने नाराजगी जताई और एरियर सहित भुगतान की मांग की।
अन्य भत्ते और सुविधाएं: ज्ञापन में मोबाइल फोन राशि का भुगतान, लंबित मानदेय, स्वामित्व योजना और कृषि संगणना के कार्यों के उचित प्रबंधन की भी मांग की गई है।
कार्यवाही न होने पर बढ़ सकता है आक्रोश
पटवारी संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि वेतन विसंगति और भत्तों की कटौती से कर्मचारियों में निराशा है। यदि शासन स्तर पर इन समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया तो आने वाले समय में कार्य व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। एसडीएम सुधीर कुशवाह ने ज्ञापन लेकर उचित माध्यम से शासन तक पहुंचाने का आश्वासन दिया है।